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राजगढ़ – जप, तप तथा त्याग से मनाया मालव केसरी पूज्य गुरुदेव श्री सौभाग्यमलजी मसा का 37वां पुण्य स्मृति दिवस

राजगढ़। मालव केसरी पूज्य गुरुदेव श्री सौभाग्यमलजी मसा के 37वी पुण्य स्मृति दिवस पर महावीर स्थानक भवन में जप, तप त्याग से मनाया। पूज्य श्री धर्मदास जैन स्वाध्याय संघ थांदला के स्वाध्याय संतोष कुमार बुरड़, अजीत खबिया, कुमारी चांदनी वागरेचा ने सोमवार को 9 से 10 बजे पुण्य स्मृति दिवस पर प्रकाश डाला। संतोष कुमार बुरड़ ने बताया कि आप गुरु को ईश्वर कह कर संबोधित करते थे और जहां भी विचरते वहां भक्तों का भीड़ लग जाता है। स्थानकवासी जैन समाज के लिए विशेष परिश्रम किया आपकी साधना बहुत ही जबरदस्ती थी। आपके 22 शिष्य थे आप की प्रेरणा से कई संस्था भी स्थापित हुई जो आज भी चल रही है। अब आपने राजगढ़ में 1961 में चातुर्मास किया। अजित खबिया ने बताया कि आप के प्रवचन बहुत ही प्रभाव शाली थे। आप को अनेक भाषा का ज्ञान था सभी के प्रति मधुरता व स्नेहता कि वर्षा होती थी। एक बार जो दर्शन के लिए आता था वह बार-बार आता था। आप एक ही लक्ष्य था जगत का कल्याण करना। आप मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र तमिलनाडु, कर्नाटक सहित देश के विभिन्न प्रांतों का भ्रमण किया। कुमारी चांदनी वागरेचा ने बताया कि आप वह जोहरी थे कि भक्तों के दर्शन करने आने पर भक्तों की इच्छा को जान जाते थे। आप हमेशा एकता का मार्ग बता देते। जनता पर आपके प्रवचन का जादुई प्रभाव तो होता था इसलिए आपको वाणी का जादूगर कहा जाता था। समाज के हितेश वागरेचा ने बताया कि सोमवार को गुप्त नाम से दयाव्रत का आयोजन था। जिसमे अनेक श्रावक-श्राविका ने भाग लिया व अनेक छोटे बच्चो ने भी शामिल हुए। एकासन, आयंबिल, उपवास, निवि आदि तपस्या हुई तथा 300 सामयिक भी हुई।

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