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स्मृति शेष… आचार्य श्री उनके 63वें जन्म दिन पर शुरू करना चाहते थे अन्न क्षेत्र… वे हमेशा कहते थे मानव सेवा जितनी कि जाए उतनी कम है..

आर्चाश्री के मन में जीवदया के लिए जो जज्बा और जुनून था, उसने मुझे ही नहीं बल्कि हर व्यक्ति को अंदर तक प्रभावित कर रखा था। उनके विचारों में हर वक्त मानव सेवा के प्रकल्प नए स्वरूप में जन्म लेते थे। चाहे कोविड सेंटर शुरू करने की मार्मिक भावना हो या फिर मानवों के कष्टों को अपना कष्ट समझकर उन्हें दूर करने के लिए अंतर आत्मा से काम करने की भावना, मैंने आचार्यश्री को कभी इस दिशा में कमजोर नहीं पाया। आचार्यश्री ऐसी शख्सियत रही जिन्होंने अपने अंतिम समय तक जन उद्धार को अपने मन और मस्तिष्क पर अंकित रखा। उन्होंने मुझे 17 अप्रैल को महातीर्थ आने के लिए बुलाया और कहा कि इन दिनों तुम्हारी छुट्टिया चल रही हैं, तो मानव सेवा के प्रकल्प को संचालित करते हुए क्यों ना मोहनखेड़ा में कोविड सेंटर शुरू किया जाए। आचार्यश्री के शब्दों में लोगों की परेशानी साफ परीलक्षित हो रही थी। आचार्यश्री की भावना को समझ मैं सरदारपुर अनुविभागीय अधिकारी श्री बीएस कलेश और डॉ. एमएल जैन के पास पहुंचा और कोविड सेंटर की नींव आचार्यश्री का नाम लेकर रख दी। गुरुदेव के मस्तिष्क की योजना को मूर्त रूप देने के लिए उद्योग मंत्री श्री राजवर्धनसिंह दत्तीगांव एवं कलेक्टर श्री आलोक सिंह से चर्चा हुई और भीषण महामारी के दौर में केवल तीन दिनों में ही कोविड सेंटर शुरू हो गया। इस दौरान लगातार गुरुदेव का मार्गदर्शन मिलता रहा। वे हमेशा कहते कि ज्यादा से ज्यादों लोगों को लाभान्वित किया जाए। 

23 मई को गुरूदेव ने मुझे बुलाया और कहा कि कोविड सेन्टर पर मरीज बहुत कम हो गये है, और महामारी का प्रभाव भी कम हो गया है। अब मानव सेवा के प्रकल्प के तहत तलेटी पर अन्न क्षेत्र आरंभ करने की मेरी हार्दिक इच्छा है। मैंने आचार्यश्री की इच्छा की स्वीकार करते हुए कहा कि गुरुदेव आपकी इच्छानुसार व्यवस्थित तरीके से अन्न क्षेत्र को संचालित किया जाएगा। गुरुदेव ने इसके क्रियान्वयन के तहत 24 मई को मुझे फिर बुलाया और कहा कि  4 जून 2021 को मेरे जन्मोत्व पर अन्न क्षेत्र चालू हो जाए, ऐसा प्रयास करें। गुरूदेव ने इस दौरान शेड का काम भी शुरू करवा दिया था लेकिन अगले ही दिन सूचना मिली कि उनका स्वास्थ्य खराब हो गया है और उन्हें इंदौर के चिकित्सालय में भर्ती कर दिया गया है। एक तरफ जहां मेरे मन में आचार्यश्री के सपने को पूर्ण करने का विचार चल रहा था तो वहीं दूसरी तरफ उनके स्वास्थ्य ने मानसिक स्थिति को विचलित कर दिया था। अचानक 2 जून की रात्री को सूचना आई कि आचार्यश्री अब इस दुनिया में हमें मार्गदर्शन देने के लिए भौतिक रूप से मौजूद नहीं रहे और वे एक नई यात्रा पर निकल गए हैं। ट्रस्ट मण्डल से मेरा अनुरोध है कि गुरूदेव की यह अन्तिम इच्छा पूरी करें और मैं इसके लिए हर संभव तन-मन से सहयोग करने के लिए तत्पर हूं। 

गुरूदेव को शत-शत नमन वंदन..

रोहित जैन

चांसलर

रिद्धि एंड सिद्ध विश्वविद्यालय 

जोलाना-राजगढ़, तहसील सरदारपुर, जिला धार

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