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कभी सुख, कभी दुःख, यही ज़िन्दगी है, ये पतझड़ का मौसम, घड़ी दो घड़ी है…. नए फूल कल फिर डगर में खिलेंगे, उदासी भरे दिन जल्द ही ढलेगे….

कोरोना से जंग हम  हौसले और जज्बे से जीतेंगे…  इंसान को चुनौतियां, तकलीफे नही.. नाउम्मीदे खत्म कर देती हैं…

पाजीटिव मंत्र में राजेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार, थिंकर्स 

98938 77004, 90094 77004 

कोरोना की विभीषिका से ज्यादा डर  एंजाइटी बढाता वातावरण..  चारों और नेगेटिविटी का वातावरण..  निंदा – परनिंदा, पक्ष -विपक्ष.. कही सिस्टम पर प्रहार तो कहीं सरकारों की खिंचाई… अपनी ढपली -अपना राग..         प्रश्न उठ रहा है कि  वैश्विक महामारी कोरोना से जंग में भला हम कहां ले जा रहे है समाज उसके ताने – बाने और देश को ?  निराशा का वातावरण भले ही घना हो पर आशा की किरणों के सामने उसकी क्या बिसात….. कोरोना की पहली जंग बुलंद हौसले से हमने जीती है… कोरोना की सेकंड वेव रूपी महायुद्ध में भी जीतेगी मानवता .. जीतेगा इंडिया??……  बस हौसला रखिये ये पतझड़ का मौसम, घड़ी दो घड़ी है….. 

“जीत उनको ही मिली हैं

जो हार से जमकर लड़े हैं,

हार के डर से डिगे जो

वो धराशायी पड़े हैं।”

उम्मीदों पर दुनिया कायम हैं… मिशन चंद्रयान… चंद्रमा पर पहुँचते कदम, धरती से और एक नई दुनिया की खोज… ऊंची-ऊंची अट्टालिकाएं, गगनचुंबी ईमारत, पॉवर से सुपर पॉवर की और बढ़ते कदम… धरती को स्वर्ग सा, जन्नत सा स्वरूप देने वाले हाथ आखिर उम्मीद पर सवार ही तो है..

एक उम्मीद ही है जिसने हमे और दुनिया को बेहद खुबसुरत बना डाला है… फिलवक्त यह पंक्तियां हमे उम्मीदों के परवान पर ले जाती हैं… दुनिया की महान रचनाएं… दुनिया के अजूबे, दुनिया में हुए महान अविष्कार महज एक, दो दिन में नही हुए बल्कि एक लंबी तपस्या, त्याग और उम्मीदों ने इन महान कार्यो, महान अविष्कारों और महानतम अजूबों को जन्म दे डाला।

दुनिया के सुपर पॉवर, टैक्नालॉजी में अग्रणी, चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाले देश उम्मीदों के दम पर ही दुनिया में अग्रणी अर्थात लीड रोल प्ले कर रहें हैं।

मशहुर शख्सियते, नेतृत्वकर्ता देश, लीडर, सफल उद्यमी, साइंटिस्ट, नामी-गिरामी चिकित्सक 21 वी सदी में आधुनिक क्रांति का शंखनाद करते दुनिया को यही संदेश दे रहे हैं कि उम्मीदों पर ही दुनिया कायम हैं… सफलता का बस एक ही मंत्र हैं उम्मीद… उम्मीद हैं तो जहां सुंदर है… धरती जन्नत है… उम्मीद है तो ये आसमां हमारा है… बुलंदिया हमारी है। इंसान को चुनौतियां, तकलीफे नही बल्कि नाउम्मीदी खत्म कर देती है।

तो आओ मिलकर उम्मीदों पर सवार होकर 21 वी सदी का भारत, समृद्ध, गौरवशाली भारत रूपी एक न्यू इंडिया का निर्माण करे।

बॉलीवुड फिल्मों के मेगास्टार (महानायक) अमिताभ बच्चन शूटिंग के दौरान जीवन और मौत से संघर्ष का सफर, टेनिस एल्बो की बीमारी से जूझते हुए महान क्रिकेटर भारत रत्न सचिन तेंदुलकर का क्रिकेट कैरियर समय से पहले समाप्ति की और था, किन्तु अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर ने उम्मीदों से निराशा पर विजय पाई और आज दुनिया में अपनी सफलता का परचम फहराया। उम्मीद और आशा वह संजीवनी बुटी है जो हमारे कैरियर को नए परवान दे सकती हैं।

परमाणु हमले में जापान का नागाशाकी और हिरोशिमा शहर लगभग तबाह हो गया था, पर उम्मीदों के दम पर इन दोनों शहरो ने फिर से खड़े होकर दुनिया को सकारात्मकता का संदेश दिया है कि हौसले के दम पर फिर से खड़ा हुआ जा सकता है….. 

दुनिया की महाशक्तियां, दुनिया के धनाढ्य देश, दुनिया के धनकुबेर, सेलिब्रिटी, स्पोर्ट्स पर्सनलिटी उम्मीद और आशा के दम पर ही सफलता के शिखर पर पहुंचे है और आज दुनिया के सामने नजीर पेश कर रहे है।

सच 21 वी सदी युवाओं की है, टेक्नॉलॉजी और डिजिटाईजेशन के इस युग में युवा नई क्रांति ला सकते हैं। भारत को साइंस, टैक्नॉलॉजी, मेडिकल, रिसर्च, एज्युकेशन के क्षेत्र में हम सुपर पॉवर बना सकते हैं। भारतीय युवाओं, भारत के उद्यमियों, भारत के वैज्ञानिको, भारत के शोधकर्ताओं और ब्यूरोक्रेट्स की प्रतिभा का लोहा दुनिया ने माना है।

भारतीय संगीत, साहित्य और कला के प्रति दुनिया की दीवानगी किसी से छिपी नही हैं।

मानाकि इस वक्त सरपट दौड़ती जिंदगी पर कोरोना  ने ब्रेक लगाया हो पर उम्मीदों पर नही… आने वाले कल के बड़े ख्वाबो पर नही…

तो आईए हौसलों और उम्मीदों को पंख लगा कर नए-नए सपनो को आकार दे… नई मंजिल, नई राहे, नए विचारों को.. यही ताकत है भारत की माटी की…

आज यह पंक्तियां… प्रासंगिक हो रही हैं कि कैसा भी वक्त है, कैसा भी दौर है.. जीत लेंगे जंग… बस आने वाले कल के लिए उम्मीदों रूपी बड़ा ख्वाब हम अपने मन में संजोए रखे। अनमोल जीवन के हर पलों को आनंद के साथ जिएं… जब तक सांसो में सांस है तब तक आस है…. आखिर हमारा कल बेहतर हो, इसी चाहत को जुनून, जज्बे से हमारे अपने फ्रंट लाइन कोरोना वारियर्स चौबीसों घंटे, सातो दिन अथक संघर्ष कर रहे है  बस  उनकी मंजिल एक ही है जीतेंगे जंग हर हाल में… फिर से मुस्काएगा इंडिया…  उम्मीदों पर दुनिया कायम है….

क्या खूब कहा है…

नए फूल कल फिर डगर में खिलेंगे, . .उदासी भरे दिन जल्द ही  ढलेगे….

लेखक राजेश शर्मा का परिचय
वर्तमान में संपूर्ण विश्व कोरोना वायरस से जंग लड रहा है। जंग में मानवता के कई ऐसे प्रहरी है जो जंग से मानव जाति को उबारने के लिए प्रण और प्राण से जुटे है। इस समसामयिक एवं विश्वव्यापी ज्वलंत समस्या पर तीक्ष्ण दृष्टि डालता आलेख मप्र की राजा भोज की ऐतिहासिक नगरी धार के वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, विचारक राजेश शर्मा ने लिखा है। लेखक राजेश शर्मा की ख्याति राज्य स्तरीय अधिमान्य पत्रकार मप्र शासन होकर लेखक, विचारक एवं प्रशासनिक परीक्षा के एक्सपर्ट के रूप में है। आपके मार्गदर्शन में कई युवा प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत है। आपने पीएससी परीक्षा एवं पत्रकारिता पर कई पुस्तकों की रचना की है। आप प्रदेश शासन की इंदौर संभाग स्तरीय पत्रकार अधिमान्यता समिति के सदस्य रहे है साथ ही पत्रकारिता की सर्वोच्च डिग्री एमजे में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर से टाॅपर रहे है।

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