Home अपना शहर श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में उपाध्याय श्री मोहनविजयजी म.सा. की पूण्यतिथि मनाई, कल...

श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में उपाध्याय श्री मोहनविजयजी म.सा. की पूण्यतिथि मनाई, कल होगा अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन

राजगढ़। दादा गुरुदेव की पाट परम्परा के अष्टम पट्टधर श्री मोहनखेड़ा तीर्थ विकास प्रेरक प.पू. वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा., मुनिराज श्री जिनचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जीतचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जनकचन्द्रविजयजी म.सा. एवं साध्वी श्री किरणप्रभाश्री जी म.सा., साध्वी श्री सद्गुणाश्री जी म.सा., साध्वी श्री संघवणश्री जी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा व श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी ट्रस्ट श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ के तत्वावधान में प.पू. उपाध्याय श्री मोहनविजयजी म.सा. पुण्यतिथि पूजा अर्चना के साथ मनायी गयी । तीर्थ के महामंत्री फतेहलाल कोठारी, मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ, कोषाध्यक्ष हुक्मीचंद वागरेचा, ट्रस्टी बाबुलाल वर्धन, संजय सराफ, मांगीलाल रामाणी, कमलेश पांचसौवोरा, आनन्दीलाल अम्बोर एवं कायमीस्वामीवात्सल्य के लाभार्थी मांगीलाल मिश्रीमलजी अम्बोर परिवार से श्री सुनिल अम्बोर व जयंतिलाल कंकुचोपड़ा, भरत शाह, अशोक जैन, चिमनलाल जैन, अशोक कापड़िया, तीर्थ महाप्रबंधक अर्जुनप्रसाद मेहता, सहप्रबंधक प्रीतेश जैन आदि ने उपाध्याय श्री मोहनविजयजी म.सा. के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्जवलित किया तत्पश्चात् आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा., मुनिमण्डल, साध्वीवृन्दों ने वासक्षेप कर उपाध्याय श्री मोहनविजयजी म.सा. को अपनी भावांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर आचार्यश्री ने कहा कि जो जीवन में निष्कपट भाव से गुरु की सेवा करता है उसका जीवन धन्य हो जाता है। गुरु के आदेश को निष्कपट भाव से स्वीकार कर लेता है उसके जीवन की महक चारों और फेल जाती है। गुरु के चरण दबाना जरुरी नहीं है गुरु भक्ति जीवन में सदैव बनी रहे उसके लिये गुरु के गुणों का विस्तार करना जरुरी है। जिन गुरु के सानिध्य में उन्नति का मार्ग मिलता है उसकी महिमा करना ही श्रेष्ठ गुरु भक्ति मानी गयी है । गुरु मूर्ति ध्यान का आलंबन है। गुरु के हम मुख दर्शन कर चरणों का पूजन व वंदन करते है जीवन के मंत्र गुरु के सिद्ध वचन होते है जो कभी त्याग के लिये, कभी प्रेरणा के लिये, तो कभी व्रत धारण करने के लिये आदेश करते है उन वचनों को स्वीकार करके गुरु भक्त का जीवन बदल जाता है सभी साधनों की सफलता मोक्ष मार्ग है । बिना गुरु कृपा के मोक्ष मार्ग भी सम्भव नहीं होता है गुरु कृपा से चिन्ता दुख आदि से मुक्ति मिल जाती है। दादा गुरुदेव ने श्री मोहनविजयजी म.सा. के जीवन का उद्धार किया । संवत् 1939 में उपाध्याय श्री की दीक्षा हुई थी। उनको अपने गुरु का 44 वर्ष का सानिध्य प्राप्त हुआ। आज हम जो श्री मोहनखेड़ा तीर्थ देख रहे है वह भी उपाध्याय श्री के नाम पर बना हुआ है।

धर्मसभा के पश्चात् श्री मांगीलाल मिश्रीमलजी सुनिलकुमारजी अम्बोर परिवार राजगढ़ द्वारा कायमी स्वामीवात्सल्य किया गया। शाम को राजगढ़ नगर की महिला व बालिका मण्डलों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुति दी गई। कल  मंगलवार को अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन रात्रि 9 बजे से प्रारम्भ होगा जिसमें देश के ख्यातनाम कवि विनीत चौहान अलवर वीररस, डाॅ. प्रवीण शुक्ल नईदिल्ली हास्य व्यंग्य, सुदीप भोला जबलपुर हास्य गीत, सुश्री मुमताज नसीम अलीगढ़ गीत गजल, जानी बैरागी राजोद हास्य व्यंग्य, अर्जुन अल्हड़ कोटा हास्य काव्य पाठ करेगें। मंच संचालन कवि शंशिकांत यादव देवास करेगें। तीर्थ के महामंत्री फतेहलाल कोठारी एवं मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ ने आग्रह करते हुये कहा है कि इन आयोजनों में अधिक से अधिक संख्या में पधारकर जिनशासन एवं गुरुगच्छ की शोभा में अभिवृद्धि करें।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!