सरदारपुर। अंग्रेजो की 200 वर्षो की गुलामी से आजादी दिलाने के लिये इस देश ने कई महान क्रांतिकारियो का बलिदान दिया है। उनकी स्मृति को चिरस्थाई बनाने के लिये एवं आने वाले पीढ़ी को इन महान अमर यौद्धाओ की ताकतो से परिचित कराने के लिये उनकी स्मृतियो को सहेजकर हम आने वाले पीढ़ियो को इनकी बलिदान की गाथा बता सकते है। लेकिन सरदारपुर तहसील के ग्राम अमझेरा मे 1857 की क्रांति के महान यौद्धा और इस देश को आजादी दिलाने के लिये अपने प्राणो की आहुती देने वाले अमर शहीद राणा बख्तावरसिंह की विरासत आज खंडहर मे तब्दील होती जा रही है। पिछले डेढ दशक से जब राणा का यह महल पुरात्तव विभाग के अधिन हुआ है। तब से अब तक इस ईमारत को संरक्षित करने की दिशा मे कोई ठोस कारगार उपाय नही हुये परिणाम स्वरूप  यह महल अब खंडहर मे तब्दील हो गया। अमझेरावासी अमर शहीद के महल की दुर्दशा को देखकर मायुस से है। 

अमर शहीद  राणा बख्तावरसिंह के वंशज उद्योग मंत्री राजवर्धनसिंह दत्तीगांव के मंत्री बनने के बाद महल की दुर्दशा दुर होने की आश जागी है। अभी तक पुरातत्व विभाग ने महल परिसर मे केवल मंच का निर्माण कराने के साथ ही मंच से लेकर अमर शहीद राणा बख्तावरसिंह की प्रतिमा तक फर्श लगवाया हैै। राणा का चौमुखा महल सहित परिसर मे कई ईमारते जर्जर होकर खंडहर मे तब्दील हो चुकी है। जबकी पुरातत्व विभाग के अधिन होने के पुर्व चौमुखा महल सहित कई ईमारते अच्छी हालात मे थी। यदि पुरातत्व विभाग इस महल की  सही तरीके से देखरेख करता तो 1857 की क्रांति के महान यौद्धा अमर शहीद राणा बख्तावरसिंह का यह महल संरक्षित होकर चिरस्थाई बना रहता।

जालियों मे कैद है राणा की प्रतिमा - पुरातत्व विभाग इस महल की सुरक्षा को लेकर कितना गंभीर है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की महल परिसर मे अमर शहीद राणा बख्तावरसिंह की प्रतिमा को तीन वर्ष पुर्व असामाजीक तत्वो ने छतिग्रस्त कर दिया था तब विभाग ने यहा पर प्रतिमा को जालीयो मे कैद करवा दिया। मानो प्रतिमा किसी बैरक मे  कैद हो। जबकी पुरातत्व विभाग को पुरे महल परिसर को सुरक्षित करवाना चाहिये। 10 फरवरी को 164 वे बलिदान दिवस पर बड़ा आयोजन होगा। जिसके लिये विभाग द्वारा प्रतिमा के आसपास लगी जालियो को हटवाया गया है। 

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