राजगढ़। कहते है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती हैं। बषर्त है कि इरादे पक्के और सोच का सकारात्मक होना जरूरी हैं। जिससे कि हर मुकाम को फतेह किया जा सकता हैं। ऐसा ही नगर की 23 वर्षिय चंदनबाला रेवर (राजपूत) ने कर दिखाया हैं। बचपन में माता-पिता की मृत्यू हो जाने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी ठिक नहीं थी कि उसे पढ़ा-लिखा सकें, लेकिन भाई के जिद के चलते चंदनबाला का सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर चयन हो सका हैं।

हाल ही में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) पद के लिए इंदौर में आयोजित आॅनलाईन परीक्षा में चंदनबाला ने शिरकत की थी। इसमें चंदनबाला का सीएचओ पद के लिए चयन हुआ हैं। चंदनबाला अपनी इस उपलब्धि का श्रेय बड़े भाई को देती हैं। माता-पिता के गुजर जाने के बाद भी भाई ने अपने सपने को कभी टूटने नहीं दिया। स्मरणीय है कि चंदनबाला ने वर्ष 2016 में स्थानीय शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से हायर सैकंडरी की पढ़ाई की। इसके बाद वह धार के जेतपुरा रोड़ स्थित नर्सिंग काॅलेज में चार वर्षिय बीएससी नर्सिंग में प्रवेश लिया। वर्तमान में उसकी चतुर्थ वर्ष की परीक्षा फरवरी में होना संभावित हैं।

बचपन में सर से माता-पिता उजड़ा साया - 

बचपन में चंदनबाला के माता-पिता की मृत्यू होने के बाद दोनों भाई-बहन दादाजी के पास रहते थे, लेकिन वर्ष 2013 में दादाजी की भी मृत्यू हो गई। तब महज 18 की आयू में भाई मोनू रेवर पर पारिवारिक जिम्मेदारी आ गई। बावजूद भाई ने अपने हौंसलों को कमजोर नहीं होने दिया और खेती करके अपनी छोटी बहन को भी इस काबिल बनाया। वर्तमान में 25 वर्षिय मोनू, एम.काॅम कर शासकीय नौकरी के लिए तैयारी कर रहे हैं।

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