राजगढ़। भारत सरकार के  शहरी विकास मंत्रालय, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, महिला एवं बाल विकास विभाग मुंबई के तत्वाधान में इंडोटेक फाउंडेशन तथा आनंदश्री ऑर्गनाइजेशन के सहयोग से नगर के कलाकार को महात्मा गांधी दर्शन पुरूस्कार स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया । राहुल व्यास पूरे भारत के एक मात्र अन्तर्राष्ट्रीय कलाकार थे जिन्हे उनकी रूपंकर कलाओं में स्वर्ण पदक से नवाजा गया । कार्यक्रम मुंबई के प्रसिद्ध सागर इंटरनेशनल सितारा हाल में आयोजित किया गया था जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री डॉ विजय शाह, गांधी फिलोसोफर लक्ष्मण गोले, गांधी विचारक डॉ संगीता नाईक उपस्थित थे । कार्यक्रम में कई  विभूतियों को सम्मान किया गया जिसमें राहुल व्यास एक है। राहुल व्यास ने भारत का नाम देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी रोशन किया है अपनी मातृभाषा हिंदी का वर्चस्व विदेशों में भी पहुचायां है। 17 दिसंबर को धार जिले में जन्मे राहुल व्यास मात्र 13 वर्ष की आयु से लगातार प्रयास से भारत सरकार द्वारा आयोजित आईआईएसएफ में एक्सपर्ट आर्टिस्ट का खिताब जीत, जेआईएसीएफ में अन्तर्राष्ट्रीय कलाकार की पदवी हासिल की, भारतीय संस्कृति सबद्द परिषद में अपनी कलाकृति चयन होने के पश्चात वर्ल्ड आर्ट दुबई 2020 में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कलाकृति का प्रदर्शन करना और पूरे भारत में स्वर्ण पदक पा कर गौरव बढ़ा दिया है। हिंदी कैलिग्राफी से डूडल आर्ट बनाना तथा गणेश जी का आकर देना इसी कला को अक्षर गणेश का नाम दिया है तथा कला को विदेशों तक पहुंचाया है।

वैक्स आर्ट भी बनाते है राहुल -

राहुल अक्षर गणेश के अलावा एब्स्ट्रैक्त आर्ट, पॉप आर्ट, कंटेम्पररी आर्ट तथा वैक्स आर्ट भी बनाए है वैक्स आर्ट भारत में एक मात्र राहुल ही बनाते है इसके अलावा राहुल कई कलाकृतियों को विकसित करने का प्रयास कर रहे है ।

कला प्रिय है राहुल -

राहुल व्यास कला क्षेत्र को अधिक पसंद करते है, राहुल डांस इंडिया डांस सीजन 5 के दो राउंड क्लियर कर चुके है साथ ही ओज रस के राष्ट्रीय कवि है वर्तमान तक उनकी दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है तथा दो पुस्तकों की पांडुलिपि हिंदी अकादमी में जमा है । आईआईटी गुवाहाटी से राहुल डाटा साइंटिस्ट की डिग्री ले चुके है ।

शासन से मदद की है जरूरत -

राहुल की आर्थिक हालात इतने मजबूत नहीं है कि वह विदेश में जा कर देश का नाम रोशन कर सकें इसलिए सरकार तथा प्रदेश सरकार से उन्हें सहयोग की अपेक्षा है परन्तु कई वर्षों से उन्हें मदद नहीं मिल पाई है।

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