राजेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार

विश्वव्यापी महामारी कोरोना ने इस सदी में जितना डर और भयाक्रांत किया वह किसी से छुपा हुआ नही है। डर, आशंका और सिहरन मन में आज भी उसी तरह व्याप्त है। समय दर समय कोरोना वैक्सीन की आगमन की आहट ने इस डर को कुछ हद तक कम जरूर किया है पर फिर भी कोरोना आज भी डर के रूप में हमारी सांसो के स्पन्दन में शायद समाया हुआ है।

माह जून और जुलाई के वक्त कोरोना अपने चरम पर था हर किसी के मन में अजीब सा डर, हर पल ऐसा लगता था मानो मौत करीब आ रही हो.. ऐसे में वे कोरोना वारियर्स, अथक लडाई लडने वाले कोरोना योद्धा और भगवान का दूसरा स्वरूप समझे जाने वाले चिकित्सक और चिकित्सा संस्थान इस घोर अंधेरे में भी आशा की मशाल थामे हुए थे। कोरोना की इस जंग में अगर हम फ्रंट लाईन पर लडने वाले, अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरो के जीवन की रक्षा करने वाले इन देवदूतों का स्मरण नही करें तो यह जंग आसान नही लगती। बात 13 जुलाई-2020 की है जब इंदौर के एक प्रतिष्ठित प्रायवेट हाॅस्पिटल में चिकित्सकीय परीक्षणो जैसे सीटी स्केन से मुझे कोरोना डिटेक्ट हुआ। उस पल एकबारगी के लिए मुझे लगा कि अब क्या होगा..अपने को संभालते हुए खुद को दिलासा देते हुए ईश्वर पर अप्रतिम आस्था और कोरोना काल में प्रदेश के सबसे बेहतर चिकित्सा संस्थान के रूप में उभरे अरविन्दों हाॅस्पिटल इंदौर मेरे जेहन में था। 13 जुलाई को ही इंदौर के उस ख्यात प्रायवेट हाॅस्पिटल से मै अरविन्दो हाॅस्पिटल इंदौर कोरोना की जंग लडने के लिए भर्ती हुआ। यकीनन जिस ख्याति, उपचार तथा प्रबंधन के लिए अरविन्दो की ख्याति थी वैसा ही कुछ मुझे अनुभूत हुआ। मैं जिस समय उपचारार्थ भर्ती हुआ उस दौरान मैं गंभीर स्थिति में था। निमोनिया से लेकर कई इंफेक्शन से दो-चार होकर जीवन और मौत से संघर्ष कर रहा था। करीब 13 दिनों तक हास्पिटल में उपचार के दौरान जो सेवा का भाव मैंने नजदीक से देखा तो मुझे सुखद अनुभूति हुई।  25 जुलाई 2020 को अरविन्दो हाॅस्पिटल से डिस्चार्ज होते समय मेरी आंखो में जीवन जीने की चाह और मौत से बचकर निकल आने की स्मृतियाॅ मेरी आंखो में तैर रही थी। यह सबकुछ ईश्वर, माता-पिता की कृपा और अरविन्दो हाॅस्पिटल की बदौलत संभव हो सका। अरविन्दो हाॅस्पिटल के एमडी एवं मुख्य कर्ता-धर्ता डाॅं. विनोद भण्डारी, उनकी धर्मपत्नी, दोनो पुत्र डाॅं. महक भण्डारी एवं डाॅं. मोहित भण्डारी तथा प्रण और प्राण से कोरोना मरीजो की सेवा में जुटी उनकी दोनो डाॅं. बहुएं हाॅस्पिटल प्रशासन, प्रबंधन एवं स्टाफ की अथक मेहनत, संक्रमण के इस चरम काल में अपनी जान की परवाह न कर हम सब को जीवन देने की चाह ने सच मानिए इंदौर के अरविन्दो हाॅस्पिटल की ख्याति मध्यप्रदेश ही नही वरन् देशभर में पहुंचाई है। जीवन और मौत के इस सफर में डाॅं. विनोद भण्डारी और उनकी पूरी टीम ने जिस प्रण और प्राण से कोरोना रिकवरी रेट की नजीर पेश की है वह सचमुच प्रशंसनीय है। कोरोना की जंग में यूं तो देश दुनिया और प्रदेश मेें प्रशासनिक महकमे, अनेक स्वयंसेवी संगठनो, सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों  ने अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन कर प्रकृति के कोरोनारूपी तांडव में मदद रूपी हाथ बढाये है यह भी स्तुतनीय है। मुझे व्यक्तिगत तौर पर उपचार के दौरान माता-पिता, आर्शीवाददाताओं, मेरे वरिष्ठ, शुभचिंतकों, मित्रों ने जंग से लडने में जो हौंसला दिया वह ताउम्र याद रहेगा। कोरोना की इस जंग में संतोष कुमार पाण्डेय जी ने अरविन्दो हास्पिटल इन्दौर द्वारा कोरोना रोगियों के लिए प्रण और प्राण से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। बकौल संतोष कुमार पाण्डेय ने अरविन्दो हास्पिटल प्रबंधन डाॅ विनोद भण्डारी, उनकी धर्मपत्नी व उनके दोनो सुयोग्य पुत्रों डाॅ. मोहित एवं मोहक तथा दोनो चिकित्सक बहूओं की सेवा, संवेदना और त्याग की प्रशंसा करते हुए कहा कि कोरोना के इस कठिन दौर में भण्डारी परिवार और अस्पताल प्रबंधन की त्याग, तपस्या और हर मरीजों के प्रति मानवीय संवेदना का भाव काबिले तारीफ है। इसके लिए मैं संपूर्ण अरविन्दो हास्पिटल इन्दौर, प्रशासन, प्रबंधन एवं स्टाॅफ के प्रति साधुवाद प्रकट करता हू। 

एक पत्रकार और प्रतियोगी परीक्षा के विशेषज्ञ के रूप में मध्यप्रदेश के उन तमाम कोरोना की जंग से जीते हुए कोरोना योद्धाओं की तरफ से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी, देश के स्वास्थ्य मंत्री डाॅं. हर्षवर्धन, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान जी से अनुरोध करूंगा कि चहुंऔर व्याप्त अंधकार के इस दौर में अरविन्दो हाॅस्पिटल इंदौर जैसा चिकित्सा संस्थान देश और प्रदेश में कोरोना रोगियों के लिये संजीवनी सिद्ध हुआ है ऐसे चिकित्सा संस्थान को सम्मान जरूर मिले.. संवेदना का जो मर्म उमडा है...जख्मों पर संवेदना रूपी मल्हम का लेप लगाते भावों का जो प्रस्फुटन पैदा हुआ है.. धन्य है ये भारत के सपूत.. धन्य है ये माॅं भारती के लाल..नमन है सेवा करते इन सुकोमल हाथों को..

क्या खूब कहा है.. 

‘‘जीना उसका जीना है

जो औरो को जीवन देता है’’

वरिष्ठ पत्रकार, राजेश शर्मा मध्यप्रदेश शासन के राज्य स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पी.एस.सी. के प्रतियोगियों को मार्गदर्शन देने के साथ-साथ पीएससी एवं पत्रकारिता की पुस्तकों के लेखक के रूप में आपकी ख्याति है। 

मो. - 9893877004

 9770667516

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  1. बहुत ही मार्मिक लेख ओर अस्पताल प्रबंधन को हृदय से धन्यवाद

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  2. वाह क्या बात है राजेश भाई अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर इसके लिए साधुवाद के पात्र हैं और आप भी । आपने अनुभवों को साझा किया ताकि वहां की अच्छाइयां समाज के सामने आ सके। धन्यवाद यह अनुकरणीय प्रयास के लिए

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