विनोद सिर्वी, धुलेट। कोरोना महामारी से देश के उद्योग ही नहीं अपितु खेती पर भी संकट मंडरा रहा है। धुलेट सहित आसपास के क्षेत्र का गेंदा फूल गुजरात सहित देश के विभिन्न राज्यों के मंदिरों, धार्मिक स्थलों तथा राजनीतिक कार्यक्रमों को सजाने में अपना विशेष महत्व रखता है। किसानों ने फरवरी माह में भी गेंदे की फसल लगाई थी, परंतु कोरोनावायरस की वजह से लगे लाक डाउन में फसलें खेतों में ही रह गई। उसके बाद भी किसानों ने उम्मीद नहीं छोड़ी और हार नहीं मानी किसानों को उम्मीद थी कि अगस्त सितंबर तक कोरोना खत्म हो जाएगा और मंदिर ,धार्मिक कार्यक्रम ,राजनीतिक कार्यक्रम चालू हो जाएंगे। जिससे गेंदे के फूल की डिमांड मार्केट में बढ़ जाएगी। परंतु ऐसा नहीं हुआ धुलेट में करीब 80 से 100 किसानों ने गेंदे के फूल की फसल लगाई है। परंतु भाव के अभाव में खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाना पड़ रहा है। किसान कमलेश वर्फा  धुलेट ने बताया कि 1 जुलाई को हमने गेंदा की फसल लगाई थी। जब फूल आने चालू ना हुए तब तो कुछ भाव था। परंतु आज गेंदा फूल को तोड़कर मंडी में पहुंचाने का भी खर्चा जेब से देना पड़ रहा है। किसान दिनेश चोयल धुलेट ने बताया कि उन्होंने 90 कैरेट गेंदा फूल अहमदाबाद मंडी में पहुंचाए थे। जो कि 100 रूपये  केरेट बीके जिसमें से 70 रूपये  प्रति कैरेट भाड़ा और 10 रूपये कमीशन 10 रूपये  तोड़ाई खर्च हुआ किसान को शुद्ध मुनाफा 90 कैरेट पर 900 रूपये  मिले अब ऐसे में किसानों का गुजारा कैसे होगा। इस वजह से खड़ी फसल पर रोटावेटर चलाना मजबूरी हो गया है ताकि अगली फसल को ले सके। वहीं धुलेट सहित आसपास के क्षेत्र में जो टमाटर की फसलें बिगड़ी है उससे किसानों को काफी नुकसान होगा । सरदारपुर तहसील में टमाटर की फसल सबसे ज्यादा धुलेट मैं ही होती है। वहीं वर्तमान में देश के विभिन्न राज्य दिल्ली, गुजरात, राजस्थान ,पंजाब, महाराष्ट्र आदि राज्यों में यहां का टमाटर जाता है। वहीं मध्यप्रदेश के इंदौर, भोपाल ,जबलपुर , उज्जैन आदि बड़े शहरों में यहां का टमाटर बिकता है।

देश के विभिन्न शहरों में जाता है यहां का टमाटर -  व्यापारी मोहनलाल जमादारी धुलेट ने बताया कि सीजन आने पर यहां से लगभग प्रतिदिन विभिन्न व्यापारियों द्वारा खरीद कर करीब 3000-4000 कैरेट टमाटर देश के विभिन्न राज्यों की मंडियों में जाता है परंतु बीमारी की वजह से टमाटर की फसल चौपट हो चुकी है। धुलेट में अधिकतर सीमांत सीमांत किसान होने की वजह से नगदी फसलें ही किसान लेते हैं। वही किसान वर्दीचंद्र गहलोत ने बताया कि उन्होंने अपने 5 बीघा टमाटर की फसल में करीब 50000 का खर्चा कर दिया। परंतु वायरस की वजह से सारी फसल चौपट हो गई है। ऐसे में आय निकालना भी मुश्किल हो गया है।

मजदूरों के रोजगार में आई कमी - धुलेट प्रतिदिन 400 से 500 मजदूर आस-पास के गांव दुधी, मनासिया, रातीमाली, सेमलिया, दत्तीगांव, राजगढ़, तिरला आदि गांव से मजदूर मजदूरी के लिए आते हैं। दुधी से मजदूर लाने वाले कालूराम ने बताया कि धुलेट से मजदूरों की डिमांड कम हो गई है। बहुत सी बार तो मजदूरों को वापस बिना रोजगार के ही घर जाना पड़ता है उल्टा किराया जेब से देना पड़ता है। क्योंकि किसानों के पास काम कराने के लिए कोई काम नहीं है।टमाटर की फसल चौपट हो गई है और गेंदे फूल का भाव नहीं है। इस बार गुजरात से भी बहुत से मजदूर गांव आ गए हैं। मजदूर तो बहुत है‌। परंतु रोजगार भी नहीं मिल रहा है।

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