विनोद सिर्वी,धुलेट। मध्य प्रदेश मैं 2019 की सोयाबीन की फसल बीमा राशि सरकार द्वारा किसानों के खाते में डालने की प्रक्रिया शुरू की। विभिन्न जिलों की लिस्ट प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लिंक पर अपलोड की। उसी लिस्ट के अनुसार किसानों ने अपने-अपने नाम सूची में देखें। धुलेट के आसपास गांव पिपरनी व अमोदिया में किसानों को फसल बीमा की राशि राहत भरी मिली। परंतु धुलेट के किसानों के साथ सौतेला व्यवहार दिखा। अब ऐसा क्यों हुआ और इसके पीछे जिम्मेदार कौन है? यह तो पता नहीं। धुलेट में कुल 163 किसानों के नाम फसल बीमा सूची में आए। सैकड़ों किसानों के नाम सूची में आए ही नहीं। जिनके आए उसमें से कूल 83 किसान ऐसे हैं जिनको ₹1000 से कम का फसल बीमा मिला 163 किसानों को कुल ₹232665 का फसल बीमा मिला। किसान हेमराज हामड ने बताया कि उनको फसल बीमा के रूप में ₹149 मिले। सरकार ने किसानों के साथ खिलवाड़ किया है। यदि देना ही नहीं था तो ₹149 भी क्यों दिए। आसपास गांव में लोगों को अच्छा फसल बीमा मिला ।परंतु धुलेट के किसानों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया गया। यह जांच का विषय है।

फसल बीमा की सूची को देख किसानों में काफी रोष है। क्योंकि 26, 27 ,28 सितंबर 2019 मैं कृषि विभाग तथा राजस्व विभाग द्वारा धुलेट में सर्वे किया गया था। जिसमें बड़ी संख्या में किसानों की फसलें अत्यधिक बारिश की वजह से नष्ट होना पाया था। जिस तरह से लगातार दो-तीन दिनों तक सर्वे किया। किसानों को सर्वे के बाद उम्मीद थी कि फसल बीमा की राशि से कुछ राहत मिलेगी। परंतु सूची को देख किसानों कि उम्मीदों पर पानी फिर गया। वहीं सूची मैं एक महिला किसान कलाबाई को फसल बीमा के रूप में 83 रुपैया मिलें। वहीं धुलेट के किसान मुकेश चौधरी, लालू सिर्वी, हरिराम रामा , बाबूलाल, भेरूलाल सेप्टा, गेंदालाल सिर्वी, आदि किसानों ने सरकार से दोषियों पर कार्रवाई कर फसल मुआवजा की मांग की। मामले में  सरदारपुर के तहसीलदार पीएम परमार ने बताया कि फसल बीमा का मामला बीमा कंपनी और बैंक संबंधित मामला है। यह बीमा कंपनी वाले ही बता सकते हैं। कि किसको कितना फसल बीमा मिलेगा।

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