राहुल राठौड़, राजोद। ग्राम राजोद में गुजरने वाली पवित्र कोटेश्वरी नदी में आए उफान से राजोद से साजोद समेत कई गांव को जोड़ने वाली छोटी पुलिया विगत कई वर्षों से क्षतिग्रस्त हैं। हर साल नदी उफान आने के बाद पुलिया में कई  जगह  गड्ढे पड़ जाते हैं। ग्रामीण लोग इस पुलिया को नई बनवाने के लिए क्षेत्रीय नेता एवं जनप्रतिनिधियों से बात कर करते है लेकिन आज तक ग्रामीण जनता की समस्याओं को कोई भी नेता या जिम्मेदार अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हो सकता है।  शायद अधिकारी जनप्रतिनिधि किसी अनहोनी का इंतजार कर रहे है, क्योंकि यह पुलिया राजोद की सबसे व्यस्ततम पुलिया के साथ ही कई गांवों को जोड़ती है। इस पुल से से हजारों लोगों को रोजाना आवागमन होता है। पूर्व में भी क्षेत्रीय लोगों ने विधायक को भी  इस बारे में अवगत करा दिया गया था। लेकिन आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारियों ने जनता की समस्याओं का हल करने की नहीं सोची। कई बार ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत राजोद एवं साजोद के सरपंच को भी  अवगत  करवा दिया लेकिन हालत जस के तस बने है। क्षेत्रीय विधायक ने भी इस बात पर कोई संज्ञान नहीं लिया। जबकि क्षेत्रीय विधायक साथ ही जिला पंचायत सदस्य भी आज तक इस समस्या से ग्रामीणों को समस्या हल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। जब पुलिया पर गड्ढे हो गए हैं तो पंचायत द्वार गड्ढों में मुर्रम डालकर  ग्रामीणों को अस्थाई तौर पर इस समस्या से कुछ समय के लिए मुक्ति जाने के लिए यह कार्य किया जाएगा। लेकिन इस समस्या का कोई स्थाई हल नहीं निकाला जाएगा। अब देखना यह है कि क्या जनप्रतिनिधि या कोई अधिकारी इस ओर ध्यान देंगे या यह जनता को अपने हाल पर ही छोड़ देंगे। अब इस बात का डर भी सताने लगा है कि शायद अगर पुलिया पूरी तरह से धराशाई हो गई तो आवागमन पूरी तरह से बंद हो जाएगा। जबकि आसपास के समस्त क्षेत्रों का अपने कार्य के लिए राजोद पर ही निर्भर है। अगर समय रहते ग्रामीणों को  इस समस्या से हल या निजात  जनप्रतिनिधि - अधिकारी 
नही दिला पाए तो हो सकता है कि आने वाले समय में पुलिया पूरी तरह से  क्षतिग्रस्त  हो जाए एवं आवागमन पूरी तरह से बन्द हो जाए। अब सरकार के जनप्रतिनिधि और अधिकारी यह पुलिया बनाकर सरकार के विकास के सपने को साकार करेंगे या फिर यही हाल बने रहेंगे।

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