रमेश प्रजापति, सरदारपुर। सरकार की राशि को पलीता लगाने की बात आम हो गई हैं। आरईएस विभाग सरदारपुर के दो तालाब पहली ही बारिश में फूट गए हैं। यह तालाब लाखों की लागत से लॉक डाउन के दौरान बनाए गये थे। इन तालाब निर्माण में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। इसलिए तो यह तालाब पहली ही बारिश में फूट गए और आरईएस विभाग में हुए बंदरबाट की कहानी बयां कर रहें।  जिन तालाबो का निर्माण की भ्रष्टाचार की नींव पर हुआ हो भला वो कैसे इतनी तेज बारिश में टिक पाते थे। सूत्रों की माने तो आरईएस विभाग में हुई ठेकेदारी प्रथा के दौरान इन तालाबो पर लागत से नाममात्र की ही राशि उपयोग की गई। इधर जिन जिम्मेदार अधिकारी की देखरेख में इन तालाबो का निर्माण हुआ था उनका स्थानांतरण हो गया हैं। ऐसे इनका जिम्मेदारी किस पर थोपी जाये यह भी सवाल है।

लाखों की लागत से हुआ था निर्माण - 
आरईएस विभाग सरदारपुर में पहले भी इस प्रकार के मामले सामने आ चुके हैं। गत दिनों क्षेत्र में हुई तेज बारिश से आरईएस विभाग सरदारपुर द्वारा ग्राम पंचायत मौलाना में 47 लाख 20 हजार की लागत से बनाए गए छापरी वाला नाला तालाब एवं ग्राम पंचायत चोटिया बालोद में 48 लाख 18 हजार की लागत से जरखेड़ा वाला नाला तालाब अपनी पहली ही बारिश ना झेल सकें एवं फुट गए। अगर इनका निर्माण कार्य सही ढंग और सही तकनीकी से किया गया होता तो यह तालाब ना फूटते। सूत्र बताते है कि यह तालाब विभाग के उपयंत्री द्वारा ठेकेदार से बनवाये गये जिसमे ना तो तकनीकि गुणवत्ता के तहत कार्य किया गया और ना ही लागत के अनुरूप राशि खर्च की गई।

इसका जिम्मेदार कौन -
लाखों की लागत से बने यह तालाब अपने निर्माण के दौरान हुए भ्रष्टाचार की कहानी खुद बया कर रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इसका जिम्मेदार कोन है, क्योकि उपयंत्री राजेश पवैया द्वारा इन तालाबो निर्माण करवाया प्रारंभ करवाया लेकिन उनका स्थानातंरण हो गया तो क्या जिस उपयंत्री के पास इन तालाबो का चार्ज है वह जिम्मेदार हैं ? या तात्कालीन आरईएस एसडीओ एएस डुडवे की देखरेख में निर्माण कार्य हुआ क्या वह जिम्मेदार हैं? लेकिन एसडीओ डुडवे का भी विगत दिनों स्थानांतरण हो गया हैं। दरअसल इन उपयंत्री राजेश पवैया द्वारा दर्जनभर से अधिक तालाब निर्माण की स्वीकृत अपने नाम पर करवा लिये और कार्य प्रारंभ किया गया। लेकिन  राजनीतिक दमखम्भ के चलते उपयंत्री राजेश पवैया का तबादला हो गया। इन तालाबो का निर्माण कार्य तात्कालीन एसडीओ एएस डुडवे ने राजनेताओं की आकांक्षाओ को पूरा करने के लिए उनकी पसंद के ठेकेदारों को कार्य दिया। लेकिन एसडीओ डुडवे भी राजनीति का शिकार हुए और उनका भी तबादला हो गया। ऐसे में यह साफ नजर आता है कि उपयंत्री पवैया और एसडीओ डुडवे ने जमकर शासन की राशि का बंदरबाट किया और इधर फलस्वरूप पहली ही बारिश में तालाब फुट गये।

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