नरेन्द्र पवाँर, दसाई। माह जून में बोनी के बाद से ही  क्षेत्र में अल्प वर्षा के चलते किसानों के चेहरे पर चिंता की लकिरें साफ दिखाई देने लगी हैं,वही बारिश नही होने से हर वर्ग परेशान नजर आ रहा है। किसानों के लिये वर्ष 2020 अभिषाप बनकर ट्वेण्टी-ट्वेण्टी मैच जैसा हो गया हैं।  इधर केन्द्र सरकार भले ही 2022 तक किसानों की आमदनी दो गुनी करने की बात कर रही है मगर किसान से वास्तव पूछा जावें तो उसे कुछ भी नहीं सुझ रहा है। जैसे जैसे समय निकल रहा हैं। किसानों के लिये विपरित परिस्थितिया बनती जा रही है। इन्द्रदेव भी इस बार समय पर साथ नही दे रहे हैं साथ ही समय रहते इन्द्रदेव नही बरसते हैं तो निश्चित ही अन्नदाताओ के आंसू छलकने लगेगे जिससे हर वर्ग परेशान हो जाऐगा। इस वर्ष की भरपाई कब होगी यह अन्दाजा लगाना मुश्किल हो जावेगा। वर्ष के प्रारम्भ में देखा जावे तो यह वर्ष किसानो के लिये मुसीबत बन कर आया हैं। पहले सोयाबीन की फसल खेतो में लहलहराने लगी थी कि बारिश ने अपना रुख बताना प्रारम्भ कर दिया परिणाम अधिक बारिश होने से फसल को काफी नुकसान हूआ। घरो तक पिला सोना नही पहूॅच पाया कही जगह तो सोयाबीन अधिक बारिश की भेट चढते सढ गया। पिले सोने की फसल की  भरपाई हुई नही थी कि लॉकडाउन के कारण खेतो में आई फसल का उचित दाम नही मिल पाने के कारण किसानो को काफी नुकसानी हुई परिणाम  फसल को बाजार में बेचने के बजाय फेकना पडी । किसानो ने इस बार हर साल की अपेक्षा खेतों में तरबूज, टमाटर, पपीता, हरी सब्जी सहित अनेक फसल को अधिक मात्रा में खेतो में लगाकर सोयाबीन की भरपाई हो इस आस से लगाई मगर यहॉ भी किसानो का साथ ईश्वर ने नही दिया। जैसे ही खेतो में इनकी फसल तैयार हूई कि कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन लग गया  जिसके चलते मण्डी या अन्य जगह अपनी उपज को नही बेच पाने के कारण और फसल खेतो में ही रही परिणाम किसानो को पककर तैयार फसल को फेकना पडी जिसके कारण आर्थिक मार झेलना पडी। जिसके कारण मंहगे भाव के बीज का पैसा भी नही निकल पाया । एक ओर सोयाबीन की मार वही दूसरी ओर लॉकडाउन के कारण नुकसानी चारो ओर मार ही मार किसानो को पडी। गेहूॅ की फसल -इतनी समस्याओ के बाद एक बार फिर किसानो को उम्मीद थी कि सारी नुकसानी की कसर गेहूॅ कि फसल से निकल जावेगी। ईश्वर ने साथ भी दिया भरपूर उत्पादन गेहॅु का हुआ लेकिन महामारी के चलते मण्डियों के बंद होने से सारा खेल बिगड गया। समय पर भाव नही मिलने के कारण एक बार फिर  किसानो के चहरे पर मायूसी छा गई और अपनी फसल को  मन मसोस कर उनको अपनी उपज ओने पोने दाम में ही बेचना पडी। इधर सब्जियों की बात करें तो गर्मी में पकी पकाई फसल हरा धनिया उखाड कर पषुओ को खिलाने के साथ ही  फेंकना भी पडा ,टमाटर लॉकडाउन के चलतें खेत में ही सड गया।
सबकुछ होने के बाद इस बार प्याज ने भी किसानो की आखों से आसूं निकाल दिये। हर बार प्याज की फसल आते ही भाव काफी अच्छे रहते हैं। इस बार हर तरह से किसान पीटता ही दिखाई दे रहा हैं। जैसे ही प्याज की फसल आई कि भाव ने मंदी का रुख ले लिया परिणाम किसानो को प्याज को अपने भण्डार ग्रह में रखना पड रहा हैं । वर्तमान में अच्छे प्याज के भाव मात्र 5 से 6 रुपये किलो ही हैं । किसान इस भाव में प्याज बेचता हैं तो मात्र लागत ही निकलती हैं ।हर फसल की तरह प्याज ने भी किसानो के साथ दगा कर  आंसू टपकाने में अपना सहयोग कर रहा हैं ।बरसात की कंमी से किसान परेषान- अब वर्तमान खरीफ की फसल में तो बोवनी के समय ही परेषानी उठाना पडी। प्रारंभ में ही रूक रूक कर बरसात होने के चलते किसानों को ेदो से तीन बार तक बोवनी करना पडी। जैसे तैसे अंचल की मुख्य फसल सोयाबीन उग कर बाहर आई तो बरसात की कमी के चलते  भरसक फुल आने के समय गर्मी के मारे भरतपा लगने से सोयाबीन में फुल की बहार गिर रही है। जिससें कई खेतों में सोयाबीन के बांझ रहने संभावना बन रही है। रोज बादल उमड घुमड कर आते तो है। मगर बिन बरसे निकल जातें है। श्रावण माह में नदी नाले उफान पर होने चाहिये वे अभी पूरी तरह सुखे पडे है। कुऐ तालाब मे भी पानी नहीं आने से वे भी रिते पडे है। वही श्रावण माह में प्रतिवर्ष बारिष की झडी लगती हैं मगर इस वर्ष श्रावण बीत जाने के बाद भी गर्मी अपना तेवर बता रही हैं ।सुबह से ही गर्मी होने के कारण फसल मुरझाने लगी है।अभी तो गर्मी ऐसे पड रही मानो कोई गर्मी का मौसम चल रहा हो । लोगो के षरीर से पसीना टपक रहा हैं ।  किसानों को खरीफ के साथ रबि की फसल की भी चिंता -इन परिस्थितियों के चलतें किसानों की सांसे अटक कर रह गई है। प्रतिवर्ष जून जूलाई में भारी बरसात होती है। जिससें भू जल स्तर भी उपर आ जाता हैं। मगर इस बार खेंतों में  देखें तो कई जगह एक फिट भी जगह नम नहीं हो पाई है। ऐसे में किसानों को इस खरीफ की फसल के साथ रबि की फसल की भी चिंता सताने लगी है। किसानों में हाहा कार की स्थिति निर्मित हो रही है।
समय पर बारिश नही होने के कारण  इन्द्रदेव को मनाने के लिये हर तरह के जतन किये जा रहे हैं। बाग रसोई, भजन कीर्तिन, शिवलिंग को जलमग्न करना, अखण्ड रामायण का पाठ के साथ-साथ जिंदा व्यक्ति की अर्थी निकालना, गधे पर गॉव के पटेल को घुमाना,सहित कई प्रकार के जतन के बाद भी इस बार इन्द्रदेव रुठे हुवे ही हैं । अब  हर कोई ईष्वर से यही कामना कर रहा हैं कि पूरा वर्ष परेषानी में निकल गया हैं।  अब तो इन्द्रेदव को बरस कर सारी कमी को दूर कर अच्छे दिन ला दे,ताकि वर्षभर की नुकसानी इस फसल ने निकल सके और चेहरे पर छाई गई मायूसी खुषी में बदल जावे ।हरे भरे खेतो से पिला सोयाबीन समय पर आ जावे और आने वाली फसल की नीव तैयार हो सके ।

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