विक्रमसिंह राठौर, अमझेरा। 1857 की क्रांति में देश की आजादी के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वालेे अमझेरा नरेश महाराणा बख्तावरसिंहजी के समय की एतिहासिक और पौेराणिक महत्व की इमारत कि चौमुखा महल की छत पुरी तरह से धराशायी ही हो गई हैसाथ ही यहाॅ माॅ नागणेचा का मंदिर भी स्थापित था वह भी पुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। खबर लगते ही बख्तावर फाउंडेेशन के सदस्य एवं अन्य ग्रामिण यहाॅ पहुंचे तथा उन्हौने बताया कि ये पुरातत्व विभाग की गंभीर लापरवाही का नतीजा है जिसके कारण महल धंस गया है जबकि महल के जीर्णोद्धार को लेकर लगातार मांग की जाती रही है साथ ही विधायक, सांसद, कलेक्टर आदि से भी कई बार महल के संरक्षण को लेकर मांग की गई लेकिन  राजा की इस ऐतिहासिक धरोेहर पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और आज वह धराशायी हो गई है केवल उसके आगे का हिस्सा बचा है जो कभी भी भरभराकर गिर जाएगा।  गौेरतलब है कि अमर शहीद महाराणा बख्तावरसिंहजी ने देश की आजादी के लिए अंग्रेेजो से सीधी लड़ाई लड़ते हुए मात्र 34 वर्ष की युवावस्था में ही 10 फरवरी 1858 कोे भारतमाता के चरणो में अपना सर्वस्व न्यौछावर करते हुए बलिदान दे दिया था।

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