धार। लोक अभियोजन संचालनालय मध्‍य प्रदेश ने आज ऑनलाईन वेबिनार के माध्‍यम से पॉक्‍सो एक्‍ट के अंतर्गत ‘’विशेष लोक अभियोजक की भूमिका रिमांड से अंतिम निर्णय तक’’ विषय पर प्रशिक्षण श्री पुरूषोत्‍तम शर्मा, महानिदेशक/संचालक लोक अभियोजन म0प्र0 की अध्‍यक्षता में आयोजित किया गया। श्री हेमन्‍त जोशी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (अपर जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश) बडवानी म0प्र0 नेमुख्‍य वक्‍ता एवं विषय विशेषज्ञ के रूप में व्‍याख्‍यान दिया।
श्री पुरुषोत्तम शर्मा ने पॉक्सो एक्ट के आवश्यकता एवं इसकी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब एक अबोध बालक या बालिका के साथ लैंगिक शोषण का अमानवीय पाशविक कृत्य की घटना अपने आप में इतनी भयावह है की एक सभ्य समाज की कल्पना को सिरे से नकार देती है।दुख तब और भी होता है जब ऐसी घटना घट जाने के बाद पीड़ित व्यक्ति व उसके परिवार जन न्याय प्राप्ति हेतु ना सिर्फ संघर्ष करते हैं वरन् कई बार लगता है कि वह बिना न्याय प्राप्त किए हार मान लेते हैं और यहां मुझे लगता है कि उस कृत्य को करने वाला जितना जिम्मेदार वह दुराचारी है जिसने वह कृत्य किया है उतनी ही जिम्मेदार यह समाज  भी है जो उसे न्याय ना दिला पाया। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमने यह निर्णय लिया है कि हम हमारे विभाग के प्रत्येक लोक अभियोजन अधिकारी को  इस अधिनियम के अंतर्गत प्रशिक्षण देंगे और उन्हें इस विषय की ओर और अधिक गंभीरता एवं जिम्मेदारी से अभियोजन संचालन हेतु प्रशिक्षित करेंगे, ताकि नन्हे- नन्हे बालक बालिकाओं के प्रति हुए घृणित अपराध को करने वाले नरपिशाचों को बख्शा ना जाए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए।
यही नहीं हमने विभाग की ओर से इस प्रकार के प्रकरणों के प्रभावी संचालन एवं समय पर न्याय प्राप्ति हेतु सुविधाओं में भी बढ़ोतरी हेतु सरकार को 11 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है। मुझे यह बताते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि वर्ष 2018 में हमने संपूर्ण भारत वर्ष में सबसे अधिक फांसी की सजा पॉस्को के अपराधियों को दिलवा कर "वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन" में मध्य प्रदेश लोक अभियोजन का नाम दर्ज करवाया था और हम निरंतर अपने इस प्रयास को आगे बढ़ाने हेतु तन मन धन से लगे हुए हैं, यह वेबिनार भी इसी की एक कड़ी है।मेरे द्वारा सुश्री सीमा शर्मा रतलाम एडीपीओ को संपूर्ण राज्य हेतु पास्को एक्ट के प्रकरणों के प्रभावी निराकरण हेतु राज्य समन्वयक बनाया गया है। मेरे द्वारा सीमा शर्मा के सहयोग से एक पुस्तक पास्को एक्ट के अनुसंधान एवं अभियोजन विषय पर लेख की गई है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस पुस्तक के माध्यम से हमारे मध्य प्रदेश के ही अभियोजन अधिकारी नहीं वरन् संपूर्ण भारत के पुलिस अधिकारी व अभियोजन अधिकारी लाभान्वित होंगे।मेरा सभी अभियोजन अधिकारियों से आह्वान है कि प्रॉसिक्यूटर को पीडित बच्चों की आवाज बनना है और समाज में एक ऐसी सीख प्रस्तुत करना है कि भविष्य में छोटे-छोटे बच्चों के विरुद्ध ऐसे घृणित कृत्य को करने के पहले किसी भी व्यक्ति का दिल दहल जाए।
श्री हेमंत जोशी द्वारा अपने व्याख्यान में पॉक्सो एक्ट की चर्चा की गयी। उन्होंने लोक अभियोजन अधिकारियों द्वारा पॉक्सो प्रकरणों का किस तरह से संचालन किये जाने के विषय में बताया।  उनके द्वारा अधिनियम के विशेष प्रावधानो को विस्तार से समझाया गया। उन्होंने न्यायालय की अभियोजन से क्या अपेक्षा रहती है इस पर भी विस्तार से चर्चा की। उम्र निर्धारण, अनुसंधान समय सीमा, CD, डीएनए आदि विषय पर न्याय दृष्टांतों के साथ उनकी व्याख्या भी की ।उन्होंने लोक अभियोजन अधिकारी की भूमिका के सम्बन्ध में विस्तार से बताया जिससे ऐसे अपराध करने वालों को अधिक से अधिक दण्ड से दण्डित किया जा सके।
अभियोजन अधिकारियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का श्री जोशी द्वारा समाधान भी दिया गया। उन्होंने न्यायाधीश एवम अभियोजन अधिकारियों की इस विषय पर साझा वेबिनार की आवश्यकता बताते हुए संचालक लोक अभियोजन से निवेदन किया कि भविष्य में इस ओर भी प्रयास करे। उनके द्वारा संचालक लोक अभियोजन से भविष्य में भी इस प्रकार के वेबिनार लगातार आयोजित किये जाने का आग्रह किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा सुश्री सीमा शर्मा,एडीपीओ/राज्‍य समन्‍वयक पॉक्‍सो,रतलाम द्वारा तैयार गई तथा कार्यक्रम का संचालन भी किया गया। प्रशिक्षण में लोक अभियोजन म0प्र0 के समस्‍त उप-संचालक,जिला लोक अभियोजन अधिकारी, पॉक्‍सो एक्‍ट के विशेष लोक अभियोजक, प्रभारी विशेष लोक अभियोजक एवं जिला समन्‍वयकों ने सम्मिलित होकर प्रशिक्षण प्राप्‍त किया।
श्रीमती मोसमी तिवारी, प्रमुख जनसंपर्क अधिकारी, संचालनालय लोक अभियोजन म0प्र0 द्वारा बताया गया कि मुख्‍य वक्‍ता श्री जोशी ने पॉक्‍सो एक्‍ट के प्रकरणों का संचालन करने के लिए नियुक्‍त विशेष लोक अभियोजकों को प्रकरण में उनके द्वारा रिमांड के प्रक्रम से प्रकरण के अंतिम निराकरण तक की उनकी भूमिका के विषय में विस्‍तार से बताया कि विशेष लोक अभियोजक का दायित्‍व न केवल दोषी को दण्डित कराना है बल्कि पॉक्‍सो एक्‍ट एवं अन्‍य लागू विधियों के अंतर्गत पीड़ित को प्राप्‍त अधिकारों एवं सेवाओं की उपलब्‍धताओं की भी जानकारी पीड़ित को देना और इस कार्य में उसकी सहायता करना भी उसका दायित्‍व है।
श्री जोशी के व्‍याख्‍यान के पश्‍चात प्रतिभागी अधिकारियों द्वारा एडीपीओ श्री सुश्री सीमा शर्मा के माध्‍यम से श्री जोशी से प्रश्‍न भी पुछे गये जिनके उत्‍तरश्री जोशीदेकर समाधान किए गये।
प्रशिक्षण उपरांत श्री अनिल बादल, जिला लोक अभियोजन अधिकारी, रतलाम द्वारा आभार प्रकट किया गया।  इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को आयोजित कराने के लिए श्री पुरूषोत्‍तम शर्मा महानिदेशक/संचालक लोक अभियोजन का धन्‍यवाद अर्पित करते हुए उन्‍होंने कहां कि म.प्र. लोक अभियोजन आपके कुशल नेतृत्‍व में निरंतर प्रगति करेंगा एवं पीडित व्‍यक्ति को सरल, सुलभ न्‍याय उपलब्‍ध हो सकेगा । श्री बादल द्वारा, श्री हेमंत जोशी जी द्वारा दिए गए प्रेरक उदबोधन एवं मागदर्शन हेतु समस्‍त अभियोजन अधिकारियों की ओर से धन्‍यवाद ज्ञापित किया गया तथा भविष्‍य में भी इसी प्रकार जुडे रहने की आशा व्‍यक्‍त की गई। श्री बादल ने समस्‍त अभियोजन अधिकारीगण तथा राज्‍य समन्‍वयक सुश्री शीमा शर्मा तथा सुश्री मौसमी तिवारी प्रमुख जनसंपर्क अधिकारी का भी इस वेबीनार को सफल बनाने हेतु आभार व्‍य‍क्‍त किया।

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