विक्रमसिंह राठौर, अमझेरा। कोरोना संकंट के जहाॅ कई दुष्परिणाम देखने में आये है वहीं कुछ अच्छे परिणामों के रूप में कई समाजों  के द्वारा सकारात्मक पहल भी की जा रही है जो वर्तमान समय के साथ आने वाले समय के लिए भी एक नई परंपरा के रूप में जानी जाएगी अभी तक शौक संतृप्त परिवारों के द्वारा मत्युभोज पर लाखो रू. की राशी खर्च कर लोगो को भोजन कराया जाता था ऐसे में ऐसी प्रथा को बंद करने के लिए व खर्च को कम करने के लिए लोगो को जागरूक भी किया जाता रहा हैै लेकिन उसका असर बहुत कम ही देखने को मिलता था लेकिन अब  कोरोना संकंट में ऐसे मामलों को लेकर  लोगो मे सकारात्मक सोच आने लगी है।  ऐसा ही एक मामला अमझेरा के राजपुत समाज में देखने को मिला जिसमें समाज के परिजनों ने अपनी माता की पगड़ी रस्म के दौरान मृत्युभोज के कार्यक्रम को निरस्त करते हुए उस राशी को  धार्मिक और सामाजिक कार्यो में लगाकर सकारात्मक पहल के साथ संदेशात्मक कार्य किया गया है।  अमझेरा में चार भाइयो मोहनसिंह परिहार , महेन्द्रसिंह परिहार,रविन्द्रसिंह परिहार एवं राजेन्द्रसिंह परिहार ने परिजनों की सहमती से अपनी माता इंदिराकुंवर परिहार के निधन के बाद उनकी पगड़ी रस्म के दौरान मृत्युभोज के कार्यक्रम को निरस्त करते हुए उस राशी को धार्मिक और सामाजिक कार्यो के लिए दान कर दी जिसके तहत राजपुत समाज श्रीराम मंदिर नानाघाट अमझेरा के लिए फर्श और मुख्य दरवाजा लगाने की घोषणा की गई एवं अमझेरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अमझेरा के लिए बीस हजार एक सौ, अमझेरा की रूखमणी श्रीकृष्ण गौशाला के लिए ग्यार हजार रू. व राजपुत समाज धार की धर्मशाला के विकास कार्य के लिए भी ग्यारह हजार रू. की राशी नगद दान की गई है। परिहार परिवार के द्वारा इस सकारात्मक पहल के लिए अमझेरा राजपुत समाज के प्रदीपसिह पंवार,विक्रमसिंह राठौर,महीपालसिंह पंवार,लक्ष्मणसिंह सोलंकी, शैलेंद्र सिंह राठौर आदि समाज के सदस्यों ने आभार व्यक्त किया है। गौरतलब है कि पूर्व में ग्राम हातोद में भी राजपूत समाज के द्वारा इस तरह की सकारात्मक पहल की जा चुकी है।

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