भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रालय में केबिनेट में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस ने राज्य शासन के 3 माह के निर्णयों से अवगत कराया।

प्रवासी श्रमिक आवागमन प्रबंधन
मंत्रि-परिषद को बताया गया कि 14 लाख 98 हजार प्रवासी श्रमिक परिवार वापस आये। इनमें से 6 लाख 8 हजार श्रमिक ट्रेन/बस से वापस लाये गये। सरकार द्वारा अन्य साधनों से गृह स्थानों तक 8 लाख श्रमिकों को पहुंचाया गया। अन्य राज्यों के पांच लाख 5 हजार मजदूरों को बसें लगाकर सीमावर्ती राज्यों की सीमा तक छोड़ा गया। प्रदेश से होकर 150 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गई। श्रमिकों के आवागमन के लिए 30 हजार से अधिक बसों के फेरे हुये। श्रमिकों के परिवहन एवं अन्य व्यवस्थाओं पर लगभग 150 करोड़ रूपये व्यय किये गये।

प्रवासी श्रमिक कल्याण
मुख्यमंत्री प्रवासी मजदूर सहायता योजना 2020 शुरू कर 1 लाख 52 हजार श्रमिकों के खातों में 15 करोड़ 22 लाख रूपये की राशि जमा की गई। प्रवासी श्रमिक आयोग का गठन किया गया। श्रम सिद्धी अभियान में 25 लाख 30 हजार से अधिक श्रमिकों का नियोजन किया गया। लगभग 3 लाख 47 हजार प्रवासी श्रमिकों को नये जॉब कार्ड प्रदान किये गये। इनमें से 1 लाख 76 हजार श्रमिकों को मनरेगा में रोजगार प्राप्त हुआ।

रोजगार सेतु
रोजगार सेतु पोर्टल प्रवासी मजदूरों एवं स्थानीय नियोक्ताओं के लिए इलेक्ट्रानिक लेबर मार्केट प्लेस के रूप में विकसित किया गया। पोर्टल पर 7 लाख 30 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिकों तथा 5 लाख 80 हजार से अधिक परिवार के सदस्यों (कुल 13 लाख 10 हजार से अधिक) का पंजीयन किया गया। अब तक 23 हजार 500 से अधिक नियोक्ता पंजीकृत हो गये हैं। साथ ही 11 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिकों को उनकी कुशलता के आधार पर स्थानीय नियोक्ताओं द्वारा रोजगार उपलब्ध करवाया गया।

गेहूँ उपार्जन
गेहूँ उपार्जन में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर रहा। पचास दिनों में लगभग 16 लाख किसानों से 1 करोड़ 29 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ का उपार्जन हुआ। देश के सभी राज्यों द्वारा कुल उपार्जन गेहूँ का एक तिहाई मध्यप्रदेश में उपार्जन किया गया। 15 लाख 93 हजार किसानों के खातों में 24 हजार करोड़ से अधिक की राशि अंतरित की गई । पूरी उपार्जन प्रक्रिया में एक भी व्यक्ति कोरोना संक्रमित नहीं हुआ।

किसान कल्याण
चना, सरसों और मसूर का उपार्जन पूर्ण किया गया। चने में दो प्रतिशत तक तिवड़ा होने पर उसकी समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई। प्रदेश के किसानों को शून्य ब्याज दर पर ऋण दिये जाने का निर्णय भी लिया गया। 16 लाख किसानों को फसल बीमा का 3100 करोड का भुगतान किया गया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधी योजना में 72 लाख से अधिक किसानों को कुल 1700 करोड़ रूपये की राशि जारी की गई।

मंडी कानून में सुधार लागू
निजी क्षेत्रों में मंडियों की स्थापना के लिए प्रावधान किया गया। गोदामों, साइलों, कोल्ड स्टोरेज आदि को भी प्रायवेट मंडी घोषित किया जा सकेगा। कृषकों से मंडी के बाहर ग्राम स्तर से फूड प्रोसेसर, निर्यातकों, होलसेल विक्रेता और अंतिम उपयोगकर्ताओं को सीधे खरीदने का प्रावधान किया गया। मंडी समितियों का निजी मंडियों के कार्य में काई हस्तक्षेप नहीं होगा। पूरे प्रदेश में एक ही लायसेंस से व्यापार करने का प्रावधान और ई-ट्रेडिंग के लिए प्रावधान किया गया।

मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना
इस योजना के क्रियान्वयन पुन: प्रारंभ किया गया। योजना के अंतर्गत श्रमिकों को दुघर्टना मृत्यु पर 4 लाख, सामान्य मृत्यु पर 2 लाख, अपंगता पर एक से दो लाख की अनुग्रह राशि नियत की गई। ऐसे 5 हजार बच्चें जो 12वीं में सर्वाधिक अंक लाएंगे उन्हें 30-30 हजार रूपये प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान किया गया। प्रसूति सहायता, शिक्षा प्रोत्साहन, नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा, व्यवसाय के लिए सहायता का प्रावधान भी योजना में किया गया। प्रवासी श्रमिकों को संबल योजना से जोड़ा गया।

पचं-परमेश्वर योजना
मंत्रि-परिषद को बताया गया कि पंच-परमेश्वर योजना को पुन: प्रारंभ किया गया। 14वें वित्त आयोग की 1555 करोड़ रूपये की राशि जारी की गई । 75 प्रतिशत राशि नवीन अद्योसंरचना, 10 प्रतिशत पेयजल व्यवस्था, 7.5 प्रतिशत संधारण कार्यो में और 7.5 प्रतिशत राशि कार्यालयीन कार्य पर खर्च की जा सकेगी।

राशन व्यवस्था
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत 25 श्रेणी के पात्र परिवारों को 1 रूपये प्रति किलो की दर से मार्च से मई 2020 तक के राशन का अग्रिम प्रदाय मार्च में ही करवाने के तहत 1 करोड 16 लाख परिवारों को 7 लाख 71 हजार मीट्रिक टन खाद्यान्न प्रदाय किया गया। अन्यत्र फंसे, बेघर, बेसहारा तथा 32 लाख व्यक्तियों को (जिनके पास राशन कार्ड नहीं था) एसडीआरएफ मद से 3 लाख 64 हजार मीट्रिक टन खाद्यान उपलब्ध कराया गया। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना अन्तर्गत हितग्राहियों को अतिरिक्त रूप से अप्रैल से जून 2020 के लिए 5 किलो प्रति हितग्राही के मान से नि:शुल्क चावल एवं 1 किलो दाल प्रति परिवार दी गई। इस योजना को अब नवम्बर 2020 तक बढाया गया है। प्रवासी मजदूर जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की पात्रता श्रेणी में शामिल नहीं है, ऐसे लगभग 2 लाख हितग्राहियों को भोजन की आवश्यकता की पूर्ति के लिए मई और जून 2020 का 10 किलो प्रति सदस्य गेंहूँ नि:शुल्क प्रदाय किया गया है।

जीवन-अमृत योजना
मंत्रि-परिषद की बैठक में बताया गया कि अब तक 3 करोड़ 35 लाख से अधिक व्यक्तियों को आयुर्वेदिक/ होम्योपैथिक एवं यूनानी दवाओं के पैकेट्स/शीशियां तथा आयुर्वेदिक काढ़ा वितरित किया गया। आयुर्वेदिक औषधि "आरोग्य कशायम" के माध्यम से अब तक लगभग 2001 कोविड पॉजीटिव मरीज और 6970 क्वारेंटाईन मरीज स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। योजना पर अब तक 35 करोड 41 लाख का व्यय हुआ है।

जीवन शक्ति योजना
मंत्रि-परिषद को बताया गया कि जीवन शक्ति योजना में 10 हजार से ज्यादा शहरी महिला उद्यमियों का पंजीयन किया गया। जिन्हें 20 लाख मास्क बनाने के कार्यादेश जारी किये गये। लगभग 10 लाख 12 हजार से अधिक मास्क तैयार होकर प्राप्त हुए। लगभग 4 लाख मास्क बिक चुकें हैं। इससे मास्क आपूर्ति और आजीविका दोनों का लाभ मिला है।

श्रम कानूनों में सुधार
मंत्रि-परिषद को बताया गया कि श्रम कानूनों में सुधार कर पंजीयन/लायसेंस अवधि को 30 दिन से घटाकर 1 दिन किया गया। 61 रजिस्टर और 13 रिटर्न के स्थान पर अब केवल एक रजिस्टर और एक ही रिटर्न का प्रावधान किया गया। कारखानों/ उद्योगों में श्रमिकों के लिए प्रतिदिन 8 घंटे के स्थान पर प्रति पाली 12 घंट कार्य करने की अनुमति दी गई। श्रमिकों के स्वास्थय, सुरक्षा, आजीविका से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया।

पी.एम. गरीब कल्याण रोजगार अभियान
पीएम गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत मध्यप्रदेश के 24 जिलों का चयन किया गया । जहां से 25 हजार से अधिक श्रमिक रोजगार की तलाश में अन्य प्रदेशों में जाते हैं । अभियान के अन्तर्गत 25 कार्यक्षेत्र चुने गये हैं और श्रमिकों को वर्ष में 125 दिन का रोजगार दिया जाएगा।

शहरी पथ विक्रेता कल्याण योजना
योजना में सभी पात्र स्ट्रीट वेंडर्स को 10 हजार रूपये तक व्यवसाय ऋण उपलब्ध कराने में सहायता का प्रावधान किया गया। ऋण पर 7 प्रतिशत ब्याज अनुदान भारत सरकार द्वारा और शेष राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। अब तक 8 लाख से अधिक पथ विक्रेता पंजीकृत किये गये। इस योजना को ग्रामीण क्षेत्रों में भी राज्य योजना के रूप में विस्तारित करने का निर्णय लिया। योजना का लाभ 5 हजार या उससे अधिक की आबादी के कस्बों में डेढ़ लाख पथ विक्रेताओं को दिया जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उद्योगों को सहायता, ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में रोजगार, कृषि एवं अन्य सम्बद्ध सेवाओं में सहायता, सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 2 प्रतिशत का अतिरिक्त ऋण के रूप में राज्यों को सहायता का पैकेज बनाकर कार्य प्रारंभ किया गया है।

अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं में विगत 3 माह में लगभग 40 हजार 500 करोड से अधिक की राशि हितग्राहियों के खातों में तथा अन्य अंतरित की गई है। चंबल प्रोग्रेस वे अब भिण्ड से राजस्थान सीमा तक कुल 316 किलोमीटर होगा। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से शासकीय स्कूलों के बच्चों का गणवेश निर्माण, पोषण आहार निर्माण करवाया जायेगा। स्व-सहायता समूहों को 4 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराये जाने का निर्णय लिया गया। 22 नगर परिषदों को समाप्त करने का निर्णय निरस्त किया गया और नगरीय क्षेत्रों में नया परिसीमन भी निरस्त किया गया है।

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