राजगढ़। 21 जून को होने वाले तीन घंटे से भी अधिक के सूर्यग्रहण को लेकर जनमानस में जबर्दस्त उहापोह मची हुई है। हर कोई इस ग्रहण से होने वाले प्रभाव और खगोलीय घटनाओं को जानने के लिए उत्सुक हैं। इस मामले में ज्योतिषियों और जानकारों ने अपने-अपने मत रखे हैं। इस ग्रहण को संपूर्ण मानवजाति के लिए गहरा असरकारक होना बताया जा रहा है। बहरहाल, संभवतः यह पहला ऐसा सूर्यग्रहण होगा जब पृथ्वी पर दिन के समय में ही महज 30 सेकेंड के लिए रात जैसा माहौल होगा और तारे भी नजर आएंगे।
पांच धाम एक मुकाम श्री माताजी मंदिर के ज्योतिषाचार्य श्री पुरूषोत्तमजी भारद्वाज ने बताया कि 21 जून रविवार को कंकणाकृति सूर्य ग्रहण होगा। जिसका पर्वकाल 3 घंटे 30 मिनिट का रहेगा। ज्योतिषार्चा श्री भारद्वाज ने बताया कि पृथ्वी पर जहां भी ग्रहण का प्रभाव होता है वहां आर्थिक संकट, प्राकृतिक आपदाएं, युद्ध आदि की स्थिति निर्मित होती ही है। धर्म व धार्मिक विचारों पर आघात के साथ ही मानव में तनाव और भय, निराशा व आलस्य जैसे माहौल का निर्माण स्वतः होता है। प्राकृतिक आपदाओं में भूकंप, बाढ़ और तूफान जनजीवन को प्रभावित करते हैं। उन्होंने बताया कि सभी ग्रहण के प्रभाव लगभग इसी तरह के होते हैं। अपनी बात को पुष्ट करते हुए ज्योतिषाचार्य श्री भारद्वाज ने बताया कि पिछले वर्ष पौष माह की अमावस्या यानी 26 दिसंबर 2019 गुरुवार को सूर्य ग्रहण के बाद के प्रभाव वर्तमान में देश और दुनिया देख रही है। वर्तमान में जो हालात नजर आते हैं उसके पीछे एक बड़ा कारण ग्रहण भी हैं।

आपदा से मिल सकती हैं राहत - 
उम्मीद की बात यह है कि इस ग्रहण के बाद काफी कुछ निदान भी मिलने की संभावनाएं हैं। देश और दुनियां में चल रही कोरोना महामारी से निपटने के लिए पूरा विश्व प्रयासरत है। संभवतः ग्रहण पश्चात इस आपदा के निवारण हेतु आयुर्वेदिक दवाइयां व वैक्सीन इत्यादि से लाभ मिलना संभव हो सकता है।

ऐसा रहेगा ग्रहण का सूतक व स्पर्ष -
ज्योतिषाचार्य श्री भारद्वाज ने बताया कि ग्रहण का सूतक 20 जून शनिवार रात्रि 10 बजे से ही आरंभ हो जाएगा। सूर्य ग्रहण स्पर्श 21 जून 2020 रविवार प्रातः 10ः11 बजे व मोक्ष 1ः41 बजे होगा।

यहां भी नजर आएगा ग्रहण, होगा असर -
भारत के साथ ही अफ्रीका (पश्चिम व दक्षिण के कुछ भागों को छोड़ कर) दक्षिण पूर्वी यूरोप मध्य-पूर्व एशिया (उतरी व पूर्व रूस को छोड़ कर) इंडोनेशिया, पाकिस्तान, चीन आदि में यह ग्रहण दिखेगा एवं  असर भी दिखाएगा।

ग्रहणकाल में यह ना करें -
ज्योतिषाचार्य श्री भारद्वाज ने सुझाव देते हुए कहा कि ग्रहण सूतक समय में शुभ कार्य नही होंगे। मंदिरों के कपाट भी बंद रहेंगे। इस अवधि में भोजन बनाना निषेध रहेगा। ग्रहण के समय यात्रा करना, शयन करना, पत्ते तोड़ना, पुष्प तोड़ना, केश कटवाना, नाखून काटना, शरीर से मैल उतारना, वस्त्र धोना,  वस्त्र सिलना, दांत मांजना, भोजन बनाना या खाना, घुड़सवारी, हाथी की सवारी, गाय, भैंस का दूध निकालना आदि निषेध है। वहीं सूतक में गर्भवती महिलाओं पर ग्रहण का अशुभ प्रभाव अत्यधिक पड़ता है। ऐसे में गर्भवती स्त्रियों को चाकू, कैंची सुई आदि का प्रयोग नही करना चाहिए। साथ ही इन्हें घर से बाहर निकलना भी निषेध है। सूतक में दूध, छाछ, दही, घी व तेल में पकाया हुवा अन्न, मिष्ठान, कलश में रखा हुवा जल राहुजनित ग्रहण के सुतकों में दूषित नही होते है। यह सूतक बालक, वृद्ध, तथा रोगियों के लिए नही होता है।

ग्रहण काल में करे यह कार्य -
ग्रहण समय में अपने ईष्ट मंत्र,  गुरु द्वारा दिये मंत्र, आदित्यहृदय स्तोत्र, सूर्याष्टक स्तोत्र आदि का का पाठ विशेषरूप से करना चाहिए। ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान एवं दान करना चाहिए। यह ग्रहण मृगशिर, आर्द्रा मिथुन राशि में होने से मिथुन, कर्क, वृश्चिक, व मीन राशि को अशुभ कहा है। वृषभ, तुला, कुम्भ व धनु राशि को मध्यम व मेष, सिंह, कन्या, व मकर राशि को अनुकूल कहा है। सूतक पूर्व प्रतिमा, जल, सूखी खाद्य सामग्री आदि में कुशा व तुलसी पत्र डाल देना चाहिए।

अगला ग्रहण 14 दिसंबर को, नहीं होगा असर - 
गौरतलब है कि 21 जून के बाद अगला सूर्यग्रहण 14 दिसंबर को होगा। हालांकि यह ग्रहण भारत देश में दिखाई नहीं देगा। इस ग्रहण का धार्मिक दृष्टि से भी कोई महत्व नहीं है। इसमें किसी प्रकार का यम नियम या सूतक आदि मान्य नही है।

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