रमेश प्रजापति, सरदारपुर। कोरोना वायरस के इस दौर में हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। लोगों को जहां घर से बाहर ना निकलने की लगातार हिदायत दी जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ चिकित्सा के क्षेत्र में चिकित्सकों से लगातार बेहतर से बेहतर इलाज करने की बात भी कहीं जा रही है। हर तरफ सेवा के लिए जुटे चिकित्सकों में से ऐसे कई चिकित्सक है जो दूसरे के परिवार को बचाने के लिए खुद के परिवार से दूर रहकर सेवा में लगे हैं।
ऐसे ही 6 चिकित्सक सरदारपुर विकासखंड के भी है जो लगभग 2 महीने से अपने परिवार से दूर रहकर धार एवं पिटोल बॉर्डर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये 6  चिकित्सक है डॉ. अनिल चौधरी पिपरनी, डॉ. मांगीलाल सेप्टा पिपरनी, डॉ. कान्हालाल सोलंकी छड़ावद, डॉ. नानु चौधरी अमोदिया, डॉ. दयालु पड़ियार पिपरनी एवं डॉ. दिलीप सतपुड़ा पिपरनी है। परिवार से दूर रहरकर इस महामारी के दौर में कोरोना वॉरियर्स के रूप में अपनी सेवा दे रहें इन सभी डॉक्टरों की इन साइड स्टोरी से आज हम आपको रूबरू करवाने जा रहें हैं।
यात्रियों की सेवा कर मिलता है सकून - डॉ अनिल चौधरी पिपरनी 
गांव पिपरनी के डॉक्टर अनिल चौधरी ने बताया कि झाबुआ जिले में सर्वप्रथम आयुष अधिकारी झाबुआ के रूप में प्रथम नियुक्ति हमारी हुई थी। 1 अप्रैल से मेरी ड्यूटी लगी थी। अभी तक  करीब 15000 हजार लोगों की थर्मल स्कैनिंग हमने  बॉर्डर पर की है। बहुत से यात्री को नार्मल सर्दी खांसी होने पर ही डरे हुए लगते हैं। और कहते हैं कि डॉक्टर कहीं मुझे कोरोना तो नहीं हो गया। हमारी टीम द्वारा यात्रियों को समझाया जाता है। कि नॉर्मल सर्दी खासी तो होती ही रहती है। इससे डरे नहीं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर घरों में ही सुरक्षित रहने की बात हम यात्रियों को कहते हैं। मुझे गर्व हो रहा है। कि आज मुझे देश की सेवा करने का मौका मिला। वहीं डॉ. चौधरी के कृषक पिता जगदीश चौधरी ने बताया कि मेरा परिवार गांव में खेती करता है मेरा एक ही लड़का है। जोकि कोरोना रूपी जंग में ढाल बनकर बॉर्डर पर तैनात है। यह मेरे लिए गर्व की बात है।
आशा है, जल्द ही जीतेंगे कोरोना से जंग - डॉ. मांगीलाल सेप्टा पिपरनी
परिवार से दूर गांव पिपरनी के डॉक्टर मांगीलाल सेप्टा ने बताया कि हम झाबुआ के एक हॉस्टल में रुके हैं। दिन हो या रात जब भी ड्यूटी लगती है तो बॉर्डर पर जाकर स्कैनिंग करने जाते हैं। हमारा एक ही लक्ष्य है। कोरोना हारे और हम जीते। वापस पुराने दिन लौट आए। इस कोरोना महामारी में यात्री बड़े परेशान हो रहे हैं। वही डॉक्टर सेप्टा की पत्नी टिना ने बताया कि मेरे पति की ड्यूटी लगे को 39 दिन हो गए हैं। वीडियो कॉलिंग से बात हो जाती है। मुझे डर तो लगता है। परंतु गर्व भी होता है। कि मेरे पति देश की सेवा में अपना समय दे रहे हैं। वही डॉक्टर सेप्टा के पिता हीरालाल कोटवाल ने कहा कि कड़ी मेहनत और मुसीबत से बेटे को पढ़ाया आज मेरा जीवन सफल हो गया। भगवान की कृपा से सब जल्द ही ठीक हो जाएगा।
देश सेवा का मौका हर किसी को नसीब नही होता - डॉ. कान्हालाल सोलंकी छड़ावद 
गांव छड़ावद के डॉक्टर कान्हालाल सोलंकी ने बताया कि हमारे देश के जवान सिपाही देश की बॉर्डर पर दिन रात अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सेवा में लगे हैं।हमारी सुरक्षा के लिए आज मुझे भी मौका मिला है। कि मैं भी गुजरात मध्य प्रदेश बॉर्डर पर ढाल बनकर कोरोना वायरस रूपी युद्ध का सामना करू आज कि मेरी ड्यूटी भी स्टेट बॉर्डर पर यात्रियों की स्कैनिंग में लगी है। देश की सेवा का मौका हर किसी को नसीब नहीं होता। 7 मई को मेरी मैरिज एनिवर्सरी थी हम प्रतिवर्ष पति पत्नी एनिवर्सरी पर परिवार के साथ पार्टी करते थे। इस बार ड्यूटी लग जाने की वजह से पार्टी नहीं हो सके वीडियो कॉलिंग से प्रतिदिन बात कर लेते हैं डॉक्टर सोलंकी के पिता मांगीलाल सोलंकी ने बताया कि जब भी मेरी बात मेरे पुत्र से होती है तो मैं यही बोलता हूं कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलेगा हम किसान हैं। हमने कभी हार नहीं मानी और संकट के समय मैं जो लोगों की मदद करें वही धर्म है।
इस दौर में देश के काम आने से जीवन सफल हो गया- डॉ. नानु चौधरी अमोदिया 
गांव अमोदिया के डॉ. नानु चौधरी की आयुष चिकित्सा अधिकारी धार के रूप में नियुक्त होने की सूचना मिली तो उन्होंने यह बात अपने पिताजी को बताई। तब चौधरी के पिता बाबूलाल चौधरी ने कहा कि देश पर यदि कोई विपदा आ जाए तो सबसे बड़ा धर्म यही है कि संकट के समय में देश के लिए तन, मन, धन के साथ खड़े होना। उनकी इच्छा थी कि उनका लड़का भारतीय सेना में जाए। परंतु कुछ कारण से वह सपना पूरा नहीं हुआ। और डॉक्टर बनकर आज देश की सेवा करने का उनका सपना पूरा हो चुका है। आज कोरोना वायरस के साथ जंग छिड़ी है। जिसमें सैनिक के रूप में डॉक्टर अपने सेवाएं दे रहे हैं। कोरोना के साथ जंग में जीत होगी। डॉ. चौधरी कहते हैं कि इस महामारी के दौर में देश के काम आना, मानो जीवन सफल हो गया हो। डॉ. चौधरी की पत्नी अनिता चौधरी शासकीय कन्या हाई सेकेंडरी स्कूल राजगढ़ मे शिक्षिका के रूप में पदस्थ हैं।
हमारा एक ही जूनून की हर हाल में कोरोना से जंग जितना - डॉ. दयालु पड़ियार पिपरनी 
ग्राम पिपरनी के डॉ. दयालु पडियार भी कोरोना के साथ जंग में अपनी सेवाएं भोज हॉस्पिटल में दे रहे हैं। डॉक्टर दयालु बताते हैं कि यह समय देश की सेवा का है। एक बार पीपीई किट पहनने के बाद ना तो पानी पिया जा सकता है और ना ही खाना खाया जा सकता है। परंतु ना तो भूख लगती है। और ना ही प्यास। बस एक ही जुनून रहता है। कि कोरोना हारे और हम जीते मुझे अपने आप पर गर्व होता है। कि भगवान ने मुझे देश की सेवा के काबिल बनाया। डॉ. पडियार टांडा में अपना क्लीनिक संचालित करते थे। शाम को घर आने पर पति पत्नी दोनों साथ में खाना खाते थे। अब शाम को होटल जाकर पत्नी से वीडियो कॉलिंग कर बात करता हूं तभी पत्नी खाना खाती है। उनकी पत्नी निकिता सोलंकी बताती है। जब कहीं से खबर आती है कि कोरोना की जंग में डॉक्टर , पुलिस, सफाई कर्मी शहीद हुए तो गांव के लोग मुझे कहते हैं। कि तू अपने पति को घर बुला ले परंतु मुझे पूर्ण विश्वास है। कि कोरोना की जंग में हमारी जीत होगी।
चाहे जो भी हों, हम हर हाल में डटे रहेंगे - डॉ. दिलीप सतपुड़ा पिपरनी 
गांव पिपरानी के डॉ. दिलीप सतपुड़ा बताते हैं कि हमें यहां बहुत गर्व हो रहा है।एक डॉ का कर्तव्य दूसरे लोगों की स्वास्थ्य ठीक करना है। और हम कोरोना वायरस रूपी जंग में पीछे नहीं हटेंगे। जैसे सैनिक का युद्ध से इंकार करना वैसा ही है, जैसे एक किसान बीज बोने से इंकार कर दे, जैसे एक व्यापारी व्यापार करने से मना कर दे या एक शिक्षक शिक्षा देने से इंकार कर दे। हमारा जो भी काम होगा, अगर हम उससे पीछे हटेंगे, तो समाज का क्या होगा?

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