विक्रमसिंह राठौर, अमझेरा। अमझेरा में रूखमणी हरण स्थली और पांडवकालिन गुफाओं केे साथ ही  प्राचिन माता अमका-झमका तीर्थ पुरे क्षै़त्र में विख्यात है साथ ही तीर्थ की ख्याती प्रदेश और देश में भी फेली हुई है । ऐसे परम पावन तीर्थ को पर्यटन के क्षेेत्र में बढ़ावा देने के लिए इन दिनो मनरेगा के तहत लाखों रू. के विकास कार्य मजदुरो के माध्यम से कराये जा रहे है जिसके तहत नाला ट्रेकिंग और पत्थरों से बनने वाली बोल्डरवाॅल संबंधी कार्यो से संपूर्ण परिसर की कायापलट का कार्य प्रगति पर है तथा प्रतिदिन करीब 300 मजदुर यहाॅ कार्य कर है जिससे लाॅकडाउन के कठिन दौर में भी उन्हेे रोजगार मिल रहा है। इस तरह का  कार्य यहां पहली बार किया जा रहा है जिसका पूरा  श्रैय जनप्रतिनिधियों के साथ ही धार कलेक्टर श्रीकांत बनोठ एवं अपर कलेक्टर संतोष वर्मा को जाता है । अपर कलेक्टर श्री वर्मा यहाॅ अपने अधिकारीयों के साथ लगातार मानिटरींग कर रहे है और अपनी विशेष रूची के साथ इस तीर्थ को विकसीत करने में लगे हुए है । साथ ही नगर के प्राचीन हरदम लाला हनुमान मंदिर और तालाब की पाल के  सौंदर्यीकरणके लिए भी वे प्रयासरत हैं  उनकी विशेष देखरेख में ही सारा कार्य हो रहा है जिसे पुरा करने में ग्राम पंचायत के सरपंच पप्पु अजनारे व सचिव रूगनाथसिंह चौहान अपनी टीम के साथ पुरी लगन के साथ कार्य में लगे हुए है और कोरोनासंकट काल और भीषण गर्मी में भी वे इस तीर्थ पर कार्ययोजना को मुर्त रूप देने में लगे हुए है जिससे आने वाली बारीश में यहाॅ आने वाले सभी लोगो को एक अलग ही परिदृष्य देखने को मिलेगा जिससे तीर्थ की महिमा दुर-दुर तक फेल सकेगी ओर यहाॅ आने वाले पर्यटको की संख्या मैं भी निश्चित रूप से कई गुना बढ़ोतरी होगी और वास्तविक  रूप में यह कार्य अमझेरा क्षेत्र में विकास में एक नया अध्याय को जोड़ने वाला होगा । तीर्थ में बारीश के दिनों में उंचाई से गिरता झरना एक जलप्रपात के रूप में दिखाई देता है तथा पूरा परिसर हरियाली से आच्छिादित हो जाता है लेकिन गर्मी के दिनों में पानी के अभाव में यहाॅ काफी परेशानीयों का सामना करना पड़ता है इसी बात को ध्यान में रखते हुए यहाॅ झरने के मार्ग को पहाड़ियों के बीच से गहरा करते हुए व उसके आस-पास बोल्डरवाॅल और पत्थरो की ट्रेचिंग से सुंदर बनाते हुए नीचे राजराजेश्वर महादेव मंदिर के परिसर तक ले जाया जा रहा है तथा यहाॅ पुराने कुण्ड की पुनः खुदाई कर उसे गहरा किया जा रहा है  गहरीकरकण के दौरान कुण्ड में से वर्षो पुरानी दबी हुई पेढ़ीयाॅं एवं अन्य संरचनाए भी बाहर आ गई है एवं पानी के रिसाव वाले स्थानों को भी बंद किया जा रहा है इसके बीच में सीमेंट कांक्रिटयुक्त मोटी दिवार आरएमएस भी बनाया जा रहा है जिससे बारीश के बाद भी यहाॅ पानी उपलब्ध रह सकेगा जिससे हर समय  यहाॅ हरियाली और सुंदरता बनी रहेगी वहीं यहाॅं दोनो ओर की बोल्डरवाॅल पेढ़ीनुमा होगी जहाॅ श्रद्धालु और पर्यटक बैठकर इस स्थान की सुंदरता को निहार सकेगें तथा यह स्थान एक सेल्फी पाइंट के रूप में भी आगंतुको का मन मोह लेगा।  मनरेगा के तहत किये जा रहे ये विकास कार्य तीर्थ की खुशहाली में मील के पत्थर साबीत होगें।

तीर्थ का परिचय - अमझेरा का नाम कालांतर में कुन्दरपुर था तथा द्वापरयगुग में  इसी अमका-झमका तीर्थ  स्थित माता अंबिका मंदिर से भगवान श्रीकृष्ण में रूखमणी का हरण कर उन्हे अपने रथ से गये थे जिनके पहियों के निषान आज भी प्रतित होते है तथा नीचे गुफाओं के बीच भगवान राज राजेश्वर महादेव एवं बाबा बैजनाथ का मंदिर स्थित है जहाॅं अज्ञातवास के दौरान पांडवो ने पाॅच शिवलिंगो की स्थापना की थी जो आज भी मौजुद है जिन पर प्राकृतिक रूप से जलाभिषेक होता रहता है  तथा गुफा मे ही कल्याणमयी माता झमका भी विराजी हुई है। यह एक तीर्थ एक तपस्थली के रूप में भी जाना जाता है जहाॅ सिद्ध साधु महात्माओं के द्वारा तप किया गया है  तथा आज भी यहाॅ आने पर सुखद आनंद की अनुभुति होती है।


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