राजेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार, विचारक 
98938 77004, 9009477004

यूं ही नही गुजरेंगे इस जहां (दुनिया) से
हम भी कुछ निशां छोड़ जाएंगे,
बनाया उस ने (ईश्वर) हमें
हम कुछ और बना जाएंगे।
गुजरते वक्त मेें, चुनौतियों के इस दौर में यह पंक्तियां सकारात्मकता का संदेश देती है कि अंधकार चाहे कितना भी घना हो पर आस रूपी प्रकाश उस अंधकार को हटाकर जीवन दैदिप्यमान बना देता है। चुनौतियां कितनी भी बड़ी क्यों न हो आखिर, हौसलों के सामने उसकी क्या बिसात.....।
वक्त कठिन हो या निराशा का पर आशा.... सकारात्मकता उस पर हर दौर में भारी रही है। सफल ईंसान, सेलिब्रिटी, सफल उद्यमी, सफल राजनेता, सफल प्रशासक भी कठिनाई के भंवर से तप कर ही तो निकले है...
सत्या नाडेल, इंदिरा नूई, लाॅर्ड स्वराज पाल, मित्तल समूह, हिन्दूजा ब्रदर्स जैसे अनेक भारतवंशी दुनिया के शक्तिशाली राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था को खड़ा करने में, संवारने में बड़ा योगदान दे रहें हैं.... भारत के कई रक्षा वैज्ञानिक, परमाणु वैज्ञानिक, कई अनुसंधानकर्ता, चिकित्सक, लेखक, शक्ति संपन्न राष्ट्रों की धुरी बने हुए है। भारतवंशियों के योगदान को अमेरिका सहित कई यूरोपियन देश लोहा मानते है...
ये नजीर है... ये रोल मॉडल है हम भारतीय युवाओं के इन्होंने निराशा से उपर उठकर चुनौतियों पर हौसलों से कामयाबी का परचम फहराया  है।
भारत को भले ही सुपर पाॅवर न माना जा रहा हो पर संकट के इस काल में कोरोना से निपटने में हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन टेबलेट का दुनिया का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश के रूप में भारत ही जाना जा रहा है। खुद सुपर पाॅवर अमेरिका और अन्य देशों ने भारत के मानवता के इन प्रयासों को सराहा है। 
लाॅकडाउन के इस दौर में हम में से कई महान वैज्ञानिक, बेहतर अनुसंधानकर्ता, श्रेष्ठ लेखक रूपी भविष्य गढ़ा जा रहा हो... यह हालांकि भविष्य की गर्त में है... पर इस दौर में हम इस लाॅकडाउन टाईम को क्वालिटी टाईम के रूप में बदल सकते है... क्या पता हम में से कोई देश का श्रेष्ठ वैज्ञानिक, रिसर्चर, डाॅक्टर, लेखक, उद्यमी, जन्म ले ले... बशर्ते हम सौं फीसदी जुनून, जज्बे और हौसले के साथ जुट जाए नए भारत... नए सपनों को गढ़ने में... 

होप, क्रिएटिविटी, पाॅजीटीविटी ये 3 शब्द जीवन को संवार सकते है... जीवन को बदल सकते है। तो हम सब तंत्र या सिस्टम की खामियों... आलोचनाओं से परे एक नई दुनिया का निर्माण करे।
21 वीं सदी का ऐसा भारत जो तकनीक, अनुसंधान, चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में सुपर पाॅवर बने। 
आओं हम सब मिलकर यह संकल्प ले कि जिस तरह सीमित संसाधनों के बीच कोरोना वाॅरियर्स, कर्मयोद्धा, फाईटर्स, चिकित्सक, नर्सिग स्टाफ, पैरामैडिकल स्टाॅफ, पुलिस और सुरक्षा में जुटे तमाम सुरक्षाकर्मी भारत देश  को मानवता को.... कोरोना वायरस जैसे अदृश्य दुश्मन से बचा रहें है हम सब को नया जीवन प्रदान कर रहें है... उसी तरह हम भी अपने राष्ट्र को नया स्वरूप, नई उर्जा, नए विचारों.... नए संकल्पों से युक्त समृद्ध वैभवशाली, सपनों सा सुंदर भारत बनाए..

क्या खूब कहा है...
 ‘‘पंख से कुछ नही होता हौसलों से उड़ान होती है।’’
यही भारत है और भारतीयता की ताकत....

लेखक राजेश शर्मा का परिचय
वर्तमान में संपूर्ण विश्व कोरोना वायरस से जंग लड रहा है। जंग में मानवता के कई ऐसे प्रहरी है जो जंग से मानव जाति को उबारने के लिए प्रण और प्राण से जुटे है। इस समसामयिक एवं विश्वव्यापी ज्वलंत समस्या पर तीक्ष्ण दृष्टि डालता आलेख मप्र की राजा भोज की ऐतिहासिक नगरी धार के वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, विचारक राजेश शर्मा ने लिखा है। लेखक राजेश शर्मा की ख्याति राज्य स्तरीय अधिमान्य पत्रकार मप्र शासन होकर लेखक, विचारक एवं प्रशासनिक परीक्षा के एक्सपर्ट के रूप में है। आपके मार्गदर्शन में कई युवा प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत है। आपने पीएससी परीक्षा एवं पत्रकारिता पर कई पुस्तकों की रचना की है। आप प्रदेश शासन की इंदौर संभाग स्तरीय पत्रकार अधिमान्यता समिति के सदस्य रहे है साथ ही पत्रकारिता की सर्वोच्च डिग्री एमजे में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर से टाॅपर रहे है।

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