राजगढ़/बदलापुर (महाराष्ट्र)। दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वर जी म.सा. की पाट परम्परा के अष्टम पटधर श्री मोहनखेड़ा तीर्थ विकास प्रेरक वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा का 13 मार्च गुरुवार को प्रतिष्ठा हेतु बदलापुर जैन श्रीसंघ में भव्य मंगल प्रवेश बड़े ही हर्ष के साथ सम्पन्न हुआ । नगर के विभिन्न मार्गो से होते प्रवेश की शोभायात्रा मंदिर जी पहुंची । दर्शन, वंदन कर वहां से प्रवचन मण्डप पहुंची । संगीतकार श्री विनित जी गेमावत द्वारा समस्त श्रद्धालुओं के साथ गुरुवंदन करवाया गया । आचार्यश्री की पावनकारी शुभ निश्रा में 15 मार्च को भव्य प्रतिष्ठा महामहोत्सव होगा। इस अवसर पर धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि गुरु ही अपने मार्गदर्शन से हमारे जीवन को श्रेष्ठ बनाते है, हमारी कठिनाईयों का निराकरण करते है । इसलिए गुरु को गोविन्द से भी बड़ा बतलाया है । आपने अनेक गुरुभक्तों के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बतलाया कि किस प्रकार दादा गुरुदेव की वंदना करने से उनके कष्टों का निवारण हुआ और उनकी वांछा पूर्ण हुई। आपने कहा कि गुरुदेव किसी विशेष जात-पात के नहीं है वरन् उनका आशीर्वाद सभी को मुक्त हस्त से मिलता है। आचार्यश्री ने प्रवचन में आपने जीवदया का संदेश दिया और कहां कि अगर लोगों ने जानवरों के प्रति करुणा की होती, उनको अपना आहार नहीं बनाया होता तो कोरोना का अभिशाप पूरे विश्व को नहीं उठाना पड़ता । आपने कहा कि मंदिर की प्रतिष्ठा के पश्चात् सम्पूर्ण नगर का चहुंमुखी विकास होगा। प्रवचन के समय आचार्यश्री से बदलापुर जैन श्रीसंघ द्वारा विनती की गई की मंदिर जी में विराजित मूलनायक श्री पाश्र्वनाथ भगवान का उप नामकरण करे जिससे इनकी पहचान बने । आचार्यश्री ने कहा कि इनको श्री चिन्तामणी पाश्र्वनाथ भगवान के नाम से जाना जावें । साथ ही पूणे नगर के अर्हम् सेवा मण्डल के प्रतिनिधियों ने इस वर्ष शाश्वत नवपद ओलीजी आराधना कराने हेतु विनती की गई जिसे आचार्यश्री ने स्वीकृति प्रदान की । दोपहर में लाभार्थी परिवार द्वारा श्री राजेन्द्रसूरि गुरुपद महापूजन का भव्य आयोजन हुआ।

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