सरदारपुर। वर्ष 2020 का प्रसिद्ध भोंगर्या हाट ग्रामो मे लगना चालु हो गया है, समाज के अनुसार भगोरिया पर्व नही बल्कि भगोंर्या हाट है। इसे आदिवासी ट्राईबल भाषा मे त्योहार बाजार भी कहा जाता है। भगोरिया को आदिवासी के वेलेटाईन-डे से जोडकर कई भ्रातिंया फैलाई जाती है। ईसको लेकर मध्यप्रदेश जयस भीमआर्मी सहित सरदारपुर के आदिवासी मुलनिवासी समाज मे इसका आक्रोश है। अगर शोशल मिडिया पर दुष्प्रचार किया जाता है तो जयस इसकी एफआईआर करवाएगा।  सरदारपुर जयस कारकारणी अध्यक्ष एवं भीम आर्मी मिडिया प्रभारी राजेन्द्रसिंह गामड़ ने बताया की आदिवासी अचंलो मे प्राचीन समय से ट्राईबल लोग होली से पूर्व अपनी खेतीबाडी से फसलो को काटकर फुरसत मे हो जाते थे। वही होली से एक सप्ताह पुर्व आदिवासी अचंलो मे साप्ताहिक लगने वाले बाजारो मे होली की सामग्री बिकने आती थी। जिसे भोंगर्या हाट कहते है। गांव की भाषा मे आज भी होली के पुर्व लगने वाले बाजारो को त्योहार बाजार कहा जाता। धीरे-धीरे बाजारो मे झुले लगने लग गये। जिससे होली से पुर्व लगने वाले बाजारो ने मेले का रुप ले लिया। एक और आदिवासी समाज मे मादल बांसुरी की थाप पर नाचने की परम्परा पिढी दर पिढी से चली आ रही है। सरदारपुर क्षैत्र से तमाम समाजजन संगठन के साथी सभी प्रिंन्ट मिडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया से अनुरोध है की भोंगर्या हाट को भगोरिया ना लिखे भोगोर्यां हाट लिखे और समाज मे फैली गलत जानकारी को दुर करे।

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