नरेन्द्र पवांर, दसाई। जैसे ही नई फसल आती हैं राजगढ कृषि मण्डी की दसाई की उपमण्डी में हमेशा ही चंद दिनो के लिये चलपहल प्रारम्भ हो जाती और कृषि उपमण्डी में सीजन की खरीदी का श्रीगणेश भी हो जाता हैं मगर इस बार की कहानी कुछ ओर ही हो गई हैं। इस बार कृषि उप मण्डी में नई फसल सोयाबीन का मण्डी में श्रीगणेश भी नही हुआ परिणाम पूरी कृषि उपमण्डी में सुबह से ही सन्नाटा छाया रहता हैं एवही खाली पडे मैदान का पूरा.पूरा लुफ्त उठाकर खेल का आनंद बच्चे ले रहे है साथ ही मैदान में गोबर के कडें भी बनाने का काम चल रहा है।  इस बार कृषि उपमण्डी में सीजन का मुर्हूत तक नही होना क्षैत्र के लिये चिंता का विषय बन गया। वही करोडो रुपये की लागत से बनी कृषि उपमण्डी में पैसे का उपयोग नही हो पा रहा है।जिससे शासन को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा हैं ।
शासन ने किसानो की फसल का समय पर उचित मूल्य मिले इसको ध्यान में रखते हूवे राजगढ मण्डी के अन्र्तगत नवम्बर 1990 में उपमण्डी का श्रीगणेश दसाई में किया गया था मगर यहॉ आज तक किसी भी सीजन में मण्डी पूरे समय नही चली जिसके कारण किसानो का इस उपमण्डी पर विश्वास नहीं है। कपास के समयः.एक समय जब कपास का रकबा काफी था। यहॉ की उपमण्डी में जगह तक नही मिलती थी दूर.दूर से कपास लेकर किसान आते थे जिससें मण्डी के साथ.साथ बाजार में भी रोनक रहती थी। जैसे ही कपास गया की मण्डी में सन्नाटा छा गया।
पिछले वर्ष बडे जोर-शोर के साथ मण्डी में खरीदी का श्रीगणेश किया गया था परिणाम सोयाबीन में आवक भी होने लगी जिससें व्यापारी और किसानो की संख्या भी बढ गई थी मगर यह सफर मात्र सोयाबीन की फसल तक ही रहा बाद में अंधेरी नगरी चोपट राजा जैसा हाल हो गया।  सोयाबीन की सीजन में मण्डी का श्रीगणेश नही हुआ लेकिन इस बार गेहूॅ की फसल की बम्पर आवक रहेगी  ऐसे में यदी समय रहते मण्डी में खरीदी का श्रीगणेश हो जाता है तो निश्चित ही किसानो को काफी फायदा होगा। उपमण्डी में हम अपनी निगाहे डाले तो यहॉ करोडो की लागत से 10 दुकाने बनाई गई जिसकी हालत काफी खराब हो चुकी है। दुकानो के अन्दर चुहें का बोलवाला बना हुआ है जिसके कारण बडे.बडे गडडे हो गये है। दुकानो की हालत को देखते हूवे ऐसा लगता है मानो की लावारिस दुकाने है ।साथ ही वर्तमान में दुकाने अन्तिम सांसे गिन रही है। मण्डी खरीदी में किसी भी प्रकार की परेशानी नही आवे इसके लिये यहॉ दो टीन शेड भी बनाये गये जिनकी हालत वर्तमान में काफी खराब हो गई है परिणाम आवारा पषु इसका फायदा ले रहे हैं। इसके अलावा बडे गोदाम की हालत भी दयनीय बनी हुई है। यदि समय रहते इस ओर किसी का ध्यान नही जाता है तो सबकुछ वीरान हो जावेगा।.ऐसे तो यहॉ की मण्डी में स्थानीय 10 व्यापारी के साथ.साथ 05 अन्य गॉव के व्यापारियों के लाइसेस बने हुवे हैं जिससे मण्डी नही चलने पर भी मण्डी को आवक हो रही है। मवेशियों के लिए पीने का होदए मंडी प्रांगण मे पर्याप्त विद्युत व्यवस्था। शोचालय, लोगो को पीने के पानी की टंकी साथ अन्य कई सुविधायें वर्तमान में बनी हुई है। कृषि उपज उपमण्डी में दसाई सहित आसपास के कई छोटे.बडें लगभग 50 गांव लगते हैं जो दसाई पर ही निर्भर रहते है। चौटिया, बालोद, पदमपुरा, चिराखान, खुंटपला, घटोदा, बालोदा, सगवाल, भिलगुन, पाना, खिलेडी, सोन्याखेडी, धामंदा, लुहारी, बामनखेडी, दंतोली सहित कई गॉव आते है। दसाई की आबादी लगभग 12 हजार हैं वही आसपास के सभी गावों की जनसंख्या  मिलाकर 50 हजार  के करीब होती है। उपमण्डी के नही चलने पर अपनी उपज को 40 किलोमीटर दूर धार या 35 किलोमीटर दूर राजगढ  ले जाना पडती है। जिससे समय के साथ.साथ आर्थिक मार भी पडती है।कृषि उपमण्डी में वर्तमान में मण्डी निरीक्षक, मण्डी उपनिरीक्षक, सहायक निरीक्षक, चौकीदार गार्ड सहित अनेक कर्मचारी कार्यरत है।

 इनका कहना है -
दसाई में मण्डी चलना चाहिये ताकि फसल का उचित मूल्य समय पर मिल सके। वर्तमान मे फसल को बेचने के लिये अन्य जगह जाना पडता है जिससे समय और पैसे दोनो की बर्बादी होती है। - रामेश्वर पाटीदार किसान    

मंडी को चलाने के लिये पुरे प्रयास किये जा रहे हैए शिघ्र ही मंडी प्रारंभ की जावेगी। - राजेश दुबे सहायक निरीक्षक उप मंडी दसाई 

दसाई की कृषि उपमंडी को नये सीजन गेंहू में चलाने के लिये व्यापारी एवं किसानों की मिटिंग शीघ्र ही बुलाई जारही है। ताकि मंडी प्रारंभ की जाकर किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिला सकें। - रेशम मंडलोई मंडी सचिव राजगढ़

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