रिंगनोद। भगवान श्रीकृष्ण हिन्दू धर्म में सर्वोच्च हैं। वे हिन्दू धर्म के केंद्र में हैं। उनका जन्म, जीवन और मृत्यु तीनों ही बहुत ही रहस्यमयी है। उन्होंने जीवन को संघर्ष की बजाय उत्साह और उत्सव में बिताने का उदाहरण प्रस्तुत किया है। हलाकि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन ही संघर्ष में व्यतीत हुआ, लेकिन फिर भी उन्होंने अपने जीवन के प्रत्येक संघर्ष या संकट को बहुत हल्के में लेकर उसे अपनी तरह से संचालित किया। कहना चाहिए कि उन्होंने अपने जीवन को रोचक, रोमांचक और ऐतिहासिक बनाने के लिए खुद ही संकट और संघर्ष को जन्म दिया। उक्त उदगार आचार्य श्री सुभाषकृष्णजी शर्मा (आमला-उज्जैन) ने  समीपस्थ गांव गुमानपुरा में राठौर परिवार द्वारा आयोजित भागवत कथा के वाचन में कही। श्रीमद भागवत कथा का आयोजन 1 जनवरी से चल रहा हैं जिसका समापन 7 जनवरी को होगा। आयोजन के तहत 3 जनवरी को शिव पार्वती विवाह व 4 जनवरी को कृष्ण जन्म उत्सव बड़ी धूम धाम से मनाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण व आसपास के लोग उपस्थित रहें।

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