राजगढ़। दादा गुरुदेव की पाट परम्परा के अष्टम पट्टधर श्री मोहनखेड़ा तीर्थ विकास प्रेरक वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा., मुनिमण्डल, साध्वीवृद्ध व आचार्य श्री विश्वरत्नसूरीश्वरजी म.सा. के मुनिमण्डल की निश्रा में आज शनिवार को राजगढ़ नगर के अति प्राचीन श्री शांतिनाथ जिन मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य तीव्रगति से प्रारम्भ हो चूका है ।
आचार्यश्री की निश्रा में उत्थापन से पूर्व मंदिर परिसर पर नवग्रह पाटला, दसदिग्पाल व अष्टमंगल पाटला पूजन का विधान विधिकारक श्री हसमुख भाई जैन ने सम्पन्न करवाया तत्पश्चात् आचार्यश्री, मुनिमण्डल, साध्वीवृंदों ने समस्त जिन प्रतिमाओं पर वासक्षेप कर प्रतिमाओं के उत्थापन की विधि प्रारम्भ करवायी । उत्थापन के पश्चात् समस्त जिन प्रतिमाओं को मंदिर परिसर के दूसरे भाग गुरु मंदिर परिसर में नूतन वेदिका पर सभी प्रतिमाओं की चल प्रतिष्ठा विविध मंत्रोच्चार के साथ आचार्यश्री द्वारा करवायी गई। चल प्रतिष्ठा से पूर्व मंदिर परिसर में प्रभु प्रतिमाओं के उत्थापन व चल प्रतिष्ठा हेतु चढ़ावों की जाजम बिछाकर महत्वपूर्ण चढ़ावें सम्पन्न किये गये ।
उत्थापन व चल प्रतिष्ठा के इन्होंने लिये लाभ- मुलनायक श्री शांतिनाथ प्रभु- अशोककुमार शांतिलालजी जैन शक्करवाला, श्री शीतलनाथ व श्री पाश्र्वनाथ प्रभु- कांतिलाल शांतिलालजी सराफ, श्री सुविधिनाथ- विरेन्द्रकुमार शांतिलालजी सराफ, श्री अजितनाथ- श्रीमती चन्दरबाई राजमलजी पोसित्रा, श्री शांतिनाथ जी द्वितीय प्रतिमा- सुनिलकुमार मथुरालालजी पारेख, श्री पारसनाथ प्रभु- मोहनलाल सुजानमल सेठ परिवार, श्री मल्लीनाथ- सुगंधीलाल वेणीरामजी सराफ, श्री पारसनाथ चलित प्रतिमा- पुखराज बसन्तीलालजी मेहता, श्री गौतमस्वामी- शेलेन्द्रकुमार शेतानमलजी सराफ, श्री पद्मावतीदेवी- राजेन्द्रकुमार लालचंदजी खजांची, पगलियांजी- दिलीपकुमार वसन्तीलालजी बाफना, चल प्रतिष्ठा के समय थाली डंका बजाने का लाभ प्रफुल्लकुमार पुनमचंदजी जैन, कंकु थापे लगाकर प्रभुजी की प्रथम आरती राजेशकुमार कामदार ने उतारी व मंगलदीपक विरेन्द्रकुमार शांतिलालजी सराफ परिवार द्वारा किया गया। आचार्यश्री ने बताया कि उक्त जिनमंदिर के शिलापूजन के चढ़ावों की जाजम 20 जनवरी सोमवार को रात्रि 8 बजे राजेन्द्र भवन में बिछाई जावेगी साथ ही उसी जाजम पर शिलापूजन करने की तारीख की घोषणा की जावेगी।

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