राजगढ़। दादा गुरुदेव की पाट परम्परा के अष्टम पट्टधर श्री मोहनखेड़ा तीर्थ विकास प्रेरक वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा, मुनि मण्डल, साध्वीवृदों की पावनतम सानिध्यता एवं श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी (ट्रस्ट) श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ के तत्वावधान में दसई निवासी अजय अशोककुमारजी नाहर की दीक्षा एवं साध्वी श्री हर्षितगुणाश्री जी म.सा., साध्वी श्री हितरत्नाश्री जी म.सा. की बड़ी दीक्षा की भव्य विधि बुधवार को प्रातः 7 बजे से प्रारम्भ होगी।
आज मंगलवार को दीक्षार्थी अजय नाहर का एतिहासिक वर्षीदान वरघोड़ा श्री महावीरस्वामी जिन मंदिर परिसर राजेन्द्र भवन से प्रातः 9 बजे प्रारम्भ हुआ । यह वरघोड़ा नगर के सभी प्रमुख मार्गो से होता हुआ श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ पर पहुंचकर धर्मसभा में तब्दील हुआ । वर्षीदान के वरघोड़े में अजय नाहर ने रुपये, पैसे, कपड़े, अक्षत, बादाम, लेखन सामग्री, बर्तन, साड़ी व दैनिक जीवन में उपयोग आने वाली सभी वस्तुऐं दोनों हाथों से खुलकर दान किये । भागवती जैन दीक्षा में वर्षीदान का बड़ा महत्व माना गया है । वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने बताया कि भगवान महावीर स्वामी व सभी तीर्थंकर परमात्मा ने अपनी दीक्षा से पूर्व एक वर्षभर तक स्वर्ण मुद्रा का वर्षीदान किया था । उसी परम्परा का निर्वाह करते हुये दीक्षा लेने वाले दीक्षार्थी अपने कर्मो का क्षय करने के लिये संसार के सभी रिश्ते नाते छोड़कर प्रभु आज्ञा को स्वीकार करने से पूर्व वर्षीदान करते हुये संसार का त्याग करते है । उसी परम्परा में आज दीक्षार्थी अजय अशोककुमारजी नाहर दसई निवासी ने संसार की समस्त वैभवशाली वस्तुओं का वर्षीदान के माध्यम से त्याग करते हुये दीक्षा मार्ग के अन्तिम शिखर की और अपने कदम अग्रसर कर लिये है। 15 जनवरी बुधवार को दीक्षा के पश्चात् अजय नाहर नये मुनि नाम से जाने एवं पहचाने जायेगें ।
दोपहर विजय मुहूर्त में श्री गुरुपद महापूजन का भव्य आयोजन गुरु समाधि मंदिर में आयोजित किया गया । शाम 4 बजे अंतिम वायणा की विधि, साध्वी श्री हर्षितगुणाश्री जी व साध्वी श्री हितरत्नाश्री जी म.सा. की बड़ी दीक्षा निमित महिला सांझी का एतिहासिक आयोजन हुआ । जिसमें महिलाओं की अकल्पनीय उपस्थिति रही । रात्रि 8 बजे राखी एवं विदाई समारोह का भव्य आयोजन हुआ । जिसमें जैन गायक विपिन पोरवाल ने उपस्थित अपार जनसैलाब को करुणा रस में भिगोया साथ ही पाण्डाल  में बैठे सभी श्रावक श्राविकाओं की अश्रुधारा विदाई के गीतों से निकली । दीक्षा की विधि श्री गुरु राजेन्द्रसूरि दीक्षा वाटिका में सम्पन्न होगी। श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी (ट्रस्ट) की और से मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ ने सभी गुरुभक्तों को आग्रह किया है कि दीक्षा समारोह कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में पधारकर जिनशासन एवं गुरुगच्छ की शौभा में अभिवृद्धि करें।

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