राजगढ़। समीप ग्राम कंजरोटा के देवराज नगर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा का आज समापन हुआ। कथा वाचक पांच धाम एक मुकाम श्री माताजी मंदिर राजगढ़ के ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तमजी भारद्वाज ने श्रीकृष्ण - सुदामा मिलन प्रसंग सुनाया। कथा का वाचन करते हुए श्री भारद्वाज ने कहा कि मित्रता परमात्मा द्वारा जीवन में दिया गया सबसे बड़ा उपहार हैं। सुख में तो साथ रहे ही लेकिन दुःख के समय सबसे आगे की पंक्ति में साथ रहें वही सच्ची मित्रता हैं। श्री भारद्वाज ने आगे कहा कि कृष्ण और सुदामा की मित्रता अजर अमर हैं। राजा का मित्र राजा ही होता हैं रंक नही, लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि मेरे वह भक्त जिसके पास प्रेम रूपी धन हैं वह कभी निर्धन नही हो सकता हैं। श्री भारद्वाज ने कृष्ण-सुदामा मिलन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कृष्ण और सुदामा दो मित्रो का मिलन ही नही बल्कि जीव व ईश्वर एवं भक्त और भगवान का मिलन था। जिसे देख हर कोई अचंभित रह गए थे। कथा परिसर में कृष्ण-सुदामा का प्रसंग सुनकर हर कोई भाव विभोर हो गया था।
समापन अवसर पर निकली धर्म यात्रा - 
कंजरोटा के देवराज नगर में आज बुधवार को भागवत कथा का समापन हुआ। समापन अवसर पर नगर में भव्य रूप से धर्मयात्रा निकाली गई। कथा स्थल से धर्म यात्रा प्रारम्भ हुई। यात्रा में सबसे आगे युवक धर्मध्वजा लेकर निकले। पीछे बैंड बाजे पर चल रहें भजनों पर महिलाएं नाचते-झूमते हुए निकली। वही यात्रा में पीछे एक रथ में कथा वाचक श्री भारद्वाज विराजमान थे जो अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। साथ ही एक रथ में भागवत पोथी भी विराजित थी। यात्रा का गांव में जगह-जगह स्वागत हुआ। यात्रा गांव में भ्रमण कर पुनः कथा स्थल पर पहुँचकर समाप्त हुई। जहाँ आयोजक समिति के लक्ष्मण डामेचा ने आयोजन में सहयोग करने वाले ग्रामवासियों को साधुवाद दिया।

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