नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून का मुद्दा अब यूरोपीय यूनियन की संसद तक पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूरोपीय संसद भारत के संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ उसके कुछ सदस्यों द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर बहस और मतदान करेगी। यूरोपियन यूनाइटेड लेफ्ट/नॉर्डिक ग्रीन लेफ्ट (GUI/NGL) ग्रुप ने इस सप्ताह की शुरुआत में संसद में यह प्रस्ताव पेश किया था। अब इस प्रस्ताव पर बुधवार को बहस होगी और इसके एक दिन बाद मतदान होगा। भारत ने यूरोपीय संसद में लाए गए इस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे अपना आंतरिक मामला बताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र, मानव अधिकार की सार्वभौमिक घोषणा (UDHR) के अनुच्छेद 15 के अलावा 2015 में हस्ताक्षरित किए गए भारत-यूरोपीय संघ सामरिक भागीदारी संयुक्त कार्य योजना और मानव अधिकारों पर यूरोपीय संघ-भारत विषयक संवाद का जिक्र किया गया है। इसमें भारतीय प्राधिकारियों के अपील की गई है कि वे CAA के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ ‘रचनात्मक वार्ता’ करें और ‘भेदभावपूर्ण CAA’ को निरस्त करने की उनकी मांग पर विचार करें। प्रस्ताव में कहा गया है, ‘CAA भारत में नागरिकता तय करने के तरीके में खतरनाक बदलाव करेगा। इससे नागरिकताविहीन लोगों के संबंध में बड़ा संकट विश्व में पैदा हो सकता है और यह बड़ी मानव पीड़ा का कारण बन सकता है।’ CAA भारत में पिछले साल दिसंबर में लागू किया गया था जिसे लेकर देश में कहीं विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं तो कहीं समर्थन में रैलियां निकल रही हैं। भारत सरकार का कहना है कि नया कानून किसी की नागरिकता नहीं छीनता है बल्कि इसे पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और उन्हें नागरिकता देने के लिए लाया गया है।

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