विनोद सिर्वी धुलेट। शनिवार को गांव धुलेट में बीज ग्राम प्रशिक्षण केंद्र इंदौर द्वारा किसानों को ग्राम पंचायत प्रशिक्षण दिया गया। कृषि विज्ञान केंद्र धार के डॉ आर एस चौहान ने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि  कृषि में बीज गुणवत्ता का विशिष्ट महत्व है। क्योंकि हमारे यहॉ फसलों की आवश्यकतानुसार सर्वोत्तम जलवायु होते हुए भी लगभग सभी फसलों का औसत उत्पादन बहुत ही कम है। जिसका प्रमुख कारण प्रदेश के कृषकों द्वारा कम गुणवत्ता वाले बीजों का लगातार प्रयोग है। जिससे फसलों में दी जाने वाली अन्य लागतों का भी हमें पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता है। फसलों में लगने वाले अन्य लागत का अधिकतम लाभ अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का प्रयोग करके ही लिया जा सकता है। उच्च गुणवत्ता के प्रमाणित बीज के प्रयोग से ही लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है।अतः किसान भाईयों को चाहिए कि वे प्रत्येक तीन वर्षा पर बीज बदल कर बुवाई की जानी चाहिए। उस बीज को उत्तम कोटि का माना जाता है जिसमें आनुवांशिक शुद्धता शत-प्रतिशत हो अन्य फसल एवं खरपतवार के बीजों से रहित हो, रोग व कीट के प्रभाव से मुक्त हो, जिसमें शक्ति और ओज भरपूर हो तथा उसकी अंकुरण क्षमता उच्च कोटि की हो, जिसमें खेत में जमाव और अन्ततः उपज अच्छी हो। किसानों ने कहा कि सर खेती से अतिरिक्त लाभ कैसे लिया जाए तब डॉक्टर एसएस चौहान ने बताया कि हमें रासायनिक दवाओं तथा खाद का कम से कम प्रयोग कर जैविक की ओर बढ़ना चाहिए वर्मी कंपोस्ट, भु-नाडेप ,घन जीवामृत तथा जीवामृत बनाकर फसलों में उपयोग करें जिससे खेती की लागत कम होगी।वहीं धुलेट किसान खेता लाल चौधरी का उदाहरण देते हुए डॉ चौहान ने बताया कि आपके गांव में ही एक किसान ने वर्मी कंपोस्ट का सैड बनाकर वर्मी कंपोस्ट खाद बना रहे हैं। जो कि भूमि तथा फसलों के लिए बहुत ही उपयोगी है।किसानों को विभाग द्वारा दी जा रही योजनाओं का लाभ भी समय-समय पर लेते रहना चाहिए। इस पर किसान नरसिंह सिंदडा ने कहा कि सर मैंने नमामि देवी नर्मदे योजना में अमरूद के पौधे अपने खेतों में लगाए थे। परंतु अभी तक उसका लाभ हमें नहीं मिला है और ना ही उद्यानिकी विभाग द्वारा कोई मार्गदर्शन हमें मिलता है। कई बार इसकी शिकायत हमने ऊपर के अधिकारी को की परंतु आज तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो किस तरह हमें योजना का लाभ मिले ग्रामीणों ने बताया कि उद्यानिकी विभाग से कभी भी उद्यानकी ग्रामीण विस्तार अधिकारी हमारे गांव में नहीं आते हैं।यहां अधिकतर उद्यानकी फसलें होती है।वहीं परियोजना संचालक आत्मा के डिएस सोलंकी ने बताया कि आज हमारी अधिक कठोर होती जा रही है पहले 35 हॉर्स पावर का ट्रैक्टर भी अच्छे से जुताई कर देता था परंतु आज 65 हॉर्स पावर का ट्रैक्टर भी ठीक से हकाई नहीं कर पाता है। हमें हरी खाद का प्रयोग करना चाहिए। सनइ, ढैचा आदि फसलों को  जमीन में ही मिला देना चाहिए। जिससे जमीन की कठोरता कम हो जाएगी। इस दौरान प्रशिक्षण केंद्र इंदौर के एस जामरे ,ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संतोष एस्के,पारस बैनल, बलवंत सोलंकी, बनसिंह सोलंकी, सरपंच रेखा बाई बहादुर सिंह चारेल, सचिव लक्ष्मण मंडवाल, बाबूलाल चौधरी‍, दिनेश पांडे, नेमालाल हामड, दिनेश पडियार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

Post a comment

 
Top