नरेन्द्र पँवार, दसाई। सहज योग आत्मज्ञान की एक अत्यंत सरल, सुलभ सहज ध्यान पद्वति हैं। सहज शब्द का अर्थ हैं साथ में जन्मा हुआ योग,अर्थात व्यक्ति की परमात्मा से एकाकारिता। अपने आप पर भरोसा करने पर परमात्मा अपने आप मिल जाते हैं वही अपने आप को सम्भालने पर दुनिया अपने आप सम्भल जावेगी। हमें तो मात्र अपने को सम्भालना हैं बाकि सब ईश्वर के हाथ में हैं । उक्त विचार मंगलवार को स्वर्ण जयंति वर्ष पूर्ण होने पर चैतन्य रथ के दसाई नगर आगमन पर दिलीप जैन ने तेजाजी चौक पर सहज योग के समय कहें। हरदेवलाला चौक से रथ का आगमन हूआ। जिसका पूरे रास्तेभर में स्वागत किया गया। रथ के आगे महिलाऐं सहज योग से क्या लाभ होते हैं। बेनर लेेकर चल रही थी। कार्यक्रम का संचालन महावीर पावेचा ने करते उपस्थित सभी को सहज योग कराया। सहज योग ध्यान पर विस्तार से चर्चा करते हुवे बताया कि सहज योग सभी धर्मो का सार हैं सहज-ध्यान द्वारा सर्व प्रथम साधक की कुण्डलीनी शक्ति जागृत होकर आत्मा को प्रकाषित करती है। स्वास्थ्य ठीक हो जाता है तथा व्यसनों से मुक्ति मिलती है। पारिवारिक और सामाजिक सम्बन्धों में तेजी से सुधार होता है। ऐसे कई कई विषयो पर जानकारी दी गई।

Post a comment

 
Top