राजगढ़। श्रीलंका में हिन्दी की पताका फहराने वाली विदुषी द्वय नधिरा श्रीवंती एवं शमिला कौमदी के आतिथ्य में हिन्दी भाषा के विकास को लेकर एक विचार गौष्ठी का आयोजन किया गया। नधिरा श्रीलंका में भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र कोलंबो में हिन्दी भाषा के उन्नयन के लिये कार्यरत है साथ ही वे एक टेलिविजन उदघोषिका भी है। जबकि शमिला कौमुदी हिन्दी भाषा शिक्षिका के साथ लेखिका के रूप में स्थापित है। यह आयोजन विगत 3 दशकों में देष में हिन्दी काव्य मंचों पर अपनी विषिष्ट छाप छोडने वाले राष्ट्रीय ओज कवि यशवंत चौहान के निवास पर समपन्न हुआ। कार्यक्रम का संयोजन श्रीलंका में हिन्दी भाषा का शिक्षण एवं हिन्दी भाषा के लिये समर्पित शिक्षिका शिरिन कुरैशी के द्वारा किया गया।
श्रीलंका से पधारी अतिथियों ने श्रीलंका में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार और उन्नयन के लिये किये जा रहे प्रयासों की विस्तृत चर्चा की। यशवंत चौहान ने भारत और श्रीलंका में आजादी के संघर्ष की समानता और सांस्कृतिक मूल्यों की विस्तृत चर्चा की। भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं श्रीलंका के राष्ट्रपिता डॅान स्टीफन सेनानायक के तुलनात्क कार्यो की विवेचना की गयी। इस अवसर पर उन्होने हिन्दी भाषा एवं हिन्दी कविता के सम्मान में उनकी प्रसिद्ध रचना ”कविता“ तथा उनके द्वारा कंपोज की गयी कुछ ग़ज़लें भी प्रस्तुत की। शिरिन कुरैशी ने श्रीलंका में अपने शैक्षणिक अनुभवों की विस्तृत चर्चा की। इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों के द्वारा यह प्रण भी लिया गया कि श्रीलंका में जो सम्मान सिंहली, तमिल एवं अंग्रेजी का है वही सम्मान और स्थान हिन्दी भाषा का भी हो, इस दिशा में सदैव ही प्रयासरत रहेंगे। इस अवसर माँ सरस्वती का चित्र भेंट कर अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन किया गया।

Post a comment

 
Top