राजगढ़। पानी में तिरे वह  मछली है, आकाश में उड़े वह पंछी है, प्रकाश दे वह सूर्य है, शीतलता दे वह चांद है, इसी प्रकार जो धर्म दे वही साधु है। जो धर्म नहीं दे सकता धर्मात्मा-साधु नहीं हो सकता। यह कहा अंतरराष्ट्रीय संसद में भारत के राजदूत, राष्ट्रसंत, विश्वविख्यात श्रीकृष्णगिरी शक्तिपीठाधिपति डॉ वसंतविजयजी म.सा.ने। वे यहां मध्यप्रदेश के धार जिले के राजगढ़ कस्बे में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा, दुनिया में यदि कोई अमूल्य वस्तु है तो वह साधु का वेश है। कठिन परिस्थितियों के बाद जिसने यह मार्ग अपनाया वही साधु हो सकता है। पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में संतश्री अनेक साधुओं द्वारा की जाने वाली राजनीतिक बातों-टिप्पणियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जिस प्रकार एक सिपाही-जवान का वस्त्र उसे देश सेवा के लक्ष्य की ओर बढ़ाता है, उसी प्रकार जिस जिस ने साधु वेश पहना है उसे धर्म के सिवाय कोई बात नहीं करनी चाहिए। साधु को साधुपन में ही रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रपंच राजनेताओं के लिए होते हैं। निश्चित ही साधु को राजगुरु बनने की अनुमति है, राजनीति करने की अनुमति नहीं। वह राजगुरु बनकर राजाओं को प्रतिबोध कर सकता है, भटकते लोगों को सही मार्ग पर ला सकता है। राष्ट्रसंत श्रीजी ने कहा कि जो धार्मिक होकर राजनीतिक अथवा राग द्वेष की बातें करे वह साधु है ही नहीं। उन्होंने कहा कि जिसने संसार को असार माना है, वही साधु है। वैराग्य अथवा संतपन से ही समाज के प्रति सहानुभूति व समाज सेवा, धर्म-भक्ति कराने का अर्थात लोगों को अध्यात्म के मार्ग पर लाने का भाव बन सकता है। अमेरिका, लंदन सहित देश-विदेश के विभिन्न शहरों में चातुर्मास कर चुके विश्वशांतिदूत एवं कन्याओं को बचाने तथा शिक्षा के प्रचार-प्रसार में अग्रणी डॉक्टर वसंतविजयजी ने कहा कि गत वर्ष विश्व शांति एवं कन्या जागृति के लिए विश्व शांति रथ को देश के अनेक राज्यों के विभिन्न शहरों-गांवों में चलवाया था, जिसमें बच्चों में संस्कार के साथ-साथ कन्याओं के प्रति वफादारी बनाए रखने की सीख दी गई थी। भटकते युवाओं को धर्म-आध्यात्मिक क्षेत्र में बढ़ाने वाले प्रेरणास्त्रोत डॉ वसंतविजयजी के द्वारा गत कई वर्षों से नवरात्रि पर्व पर बगैर डांडिया-नृत्य के उत्कृष्ट उच्च कोटि की संगीतमय भक्ति कराई जाती है। इसी क्रम में पाश्चात्य संस्कृति के नववर्ष पर भी नशे, शराब जैसी पार्टियों के विरुद्ध किसी भी बड़े तीर्थधाम में वे हजारों युवाओं को भक्ति के साथ अपनी दिव्य  महामांगलिक प्रदान कर सुखद भविष्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। बीते अनेक वर्षों की भांति इस बार नववर्ष पर 31 दिसंबर की रात्रि को 9:00 बजे से श्रीनाकोड़ा तीर्थ धाम में होगी। मंत्र शिरोमणि डॉ वसंतगुरुजी ने कहा कि संत कितना भी प्रेक्टिकल को वह अपने आध्यात्मिक ज्ञान से भटकते लोगों अथवा नास्तिक को आस्तिक बनाकर सही राह दिखलाए वही संत है। हिमालय व विद्यांचल आदि क्षेत्रों में कठिन तपस्याएं-साधनाएं कर 30 हजार से अधिक मंत्रों को सिद्ध कर चुके डॉ वसंतविजयजी 20 वर्षों से अपनी चमत्कारी मांगलिक के माध्यम से सर्व समाज के लोगों को दिव्यता प्रदान कर रहे हैं। मौखिक रूप से अपने मूलाधार चक्र से हजारों-लाखों लोगों की मौजूदगी में उनके शरीर में मंत्र शक्तिपात से प्रवेश कराकर देव दर्शन, रंगों से, कंपन से, रोमांच प्रदान कर लाभान्वित कराते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति को समाज के प्रत्येक प्राणी के भले की कामना करनी चाहिए। वे स्वयं भी ऐसे ही परमात्मा के 'मैजिक मंत्र' को जन-जन के कल्याण हेतु प्रवाहित-प्रसारित करते हैं। उल्लेखनीय है कि संत श्रीजी त्रिदिवसीय सर्व धर्म जनकल्याण महोत्सव के तहत राजगढ़ कस्बे में अपनी धर्म प्रभावना-मांगलिक आशीर्वाद प्रदान करने आए हैं। इस दौरान डॉ सुनील मंडलेचा, राजेन्द्र कोठारी, राहुल जैन, नरेंद्र गर्ग, गोपाल सोनी सहित अनेक श्रद्धालु भी मौजूद रहे।

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