नई दिल्ली। जामिया हिंसा मामले में आज दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई है। इस मामले में एक याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई है जिसमें हिंसा की जांच के लिए न्यायाकि जांच की मांग की गई है। याचिका में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए गए हैं। बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई थी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ताओं से हाईकोर्ट जाने के लिए कहा था। पहली याचिका वकील रिजवान द्वारा दायर की गई, जिसमें विश्वविद्यालय में हुई हिंसा का पता लगाने के लिए तथ्यान्वेषण समिति की स्थापना करने का अनुरोध किया गया। दूसरी संसद भवन के दूसरी तरफ स्थित जामा मस्जिद के इमाम और ओखला के दो निवासियों के तरफ से दायर की गई, जिसमें जामिया मिल्लिया पर हिंसा की जांच सीबीआई या एसआईटी जैसी किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराने का अनुरोध किया गया है। इमाम और दो अन्य की तरफ से वकील महमूद प्राचा ने याचिका दायर की और उन्होंने कथित रूप से दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की। याचिका में कहा गया कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि उन्हें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ तथ्यों और सबूतों से छेड़छाड़ करने का समय न मिले। 15 दिसंबर को जामिया इलाके में प्रदर्शनकारियों ने जबरदस्त हिंसा की थी। डीटीसी की चार बसों में आग लगाने के साथ-साथ पुलिस पर भी हमला किया गया था। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने भी लाठी चार्ज और आंसू गैस के गोले दागे थे।

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