नरेन्द्र पंवार, दसाई। धर्म के मार्ग पर चलने से जीवन मे कभी भी काटे नही आते है हमेशा ही फुल ही मिलते है। इसलिये धर्म के काम मे आगे रहे। संयम का मार्ग अपने जीवन को धन्य बनाने का मार्ग है। वही इस मार्ग से अपने जीवन का उदय भी हो रहा हैं। उक्त विचार मंगलवार को तेजाजी चौक पर प्रथम आगम पर आचार्य श्री ऋषभचंद सूरीश्वरजी  म.सा. ने दीक्षार्थी के बहुमान कार्यक्रम के दौरान कहे। प्रातः 9 बजे संजय कालोनी से आचार्यश्री के साथ-साथ मुनिमण्डल का भव्य मंगल प्रवेश हुआ।
सांसारिक जीवन को त्यागकर 15 जनवरी 2020 मे मोहनखेडा तीर्थ पर दीक्षा लेने वाले मुमुक्षु अजय नाहर का वर्षीदान वरघोडा प्रारम्भ हुआ जो नगर के प्रमुख मार्गो से होता हुआ तेजाजी चैक पहुॅचा जहॉ धर्मसभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में श्रीसंघ अध्यक्ष संजय पिपाडा, प्रवीण मण्डलेचा, निलेश सियाल, निलेश लोढा, जितेन्द्र लोढा ने दीप प्रज्जवलन किया।
स्वागत भाषण सुभाष मण्डलेचा ने दिया। स्वागत गीत नेहा, मुस्कान पावेचा ने प्रस्तुत किया। वही दसाई से अन्तिम बिदाई पर युक्ता मण्डलेचा ने सुन्दर गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन राकेश नाहर ने किया। आभार प्रवीण मण्डलेचा ने व्यक्त किया।
दसाई के इतिहास मे पहली बार वर्षीदान वरघोडा निकला जिसमे मुमुक्षु अजय नाहर ने दोनो हाथो से खुलकर दान किया। यह भावविहोर दर्ष देख हर किसी की आंखो से आसुं निकल गये। वरघोडा जिस जगह से गुजरा हर किसी ने स्वागत किया जिसके कारण पूरे नगर मे धार्मिक माहौल बन गया। मुमुक्षु द्वारा कपडे, रुपये, चावल, बर्तन, पेन, काफी सहित कई सामग्री का वर्षीदान किया।
आचार्यश्री के प्रथम नगर आगम पर श्रीसंघ के वरिष्ठ बाबूलाल मण्डलेचा, शैतानमल नाहर, मांगीलाल लोढा, ज्ञानचन्द्र पावेचा, पंकज बुरड, सुरेष नाहर, सुरेष मेहता, जितेन्द्र नाहर, सुरेषचंद सियाल, महावीर खाबिया द्वारा कांबर्ली औढाई गई।
सांसारिक जीवन को त्यागकर साधू जीवन व्यतीत करने जा रहे अजय नाहर का अभिनंदन-पत्र पारसमल पावेचा, संजय पिपाडा, सागरमल बम, तेजमल चण्डालिया, दिलीप मण्डलेचा, नरेन्द्र जैन, सुरेश नाहर ने देकर बहुमान किया। वही राजेन्द्र नवयुवक परिषद् परिवार द्वारा भी अभिनंद पत्र दिया गया।
दीक्षा समारोह को यादगार बनाने के लिये सोमवार की रात्रि मे इन्दौर की अदिति कोठारी ने एक से बढकर एक स्तवन प्रस्तुत किये। केसरियो रंग लागियो वेरागी स्वतन की प्रस्तुति ने हर किसी को तांलिया बजाने पर मजबूर कर दिया। जीवन मे आने वाले सारे त्यौहारो पर स्तवन की प्रस्तुति  पर हर किसी ने नृत्य किया। अन्तिम बिदाई पर माता के पैर पूजन करते समय हर किसी की आखों से आंसू निकल गये।

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