नरेन्द्र पँवार, दसाई। परमात्मा भी मानव जीवन पाना चाहते है हमे तो मानव जीवन मिला है। इसका उपयोग क्यो नही कर रहे है। धर्म ही हमारी रक्षा करता हैं। लेकिन हम धर्म के कार्य में पिछे जाते जा रहे है। इस दुनिया मे किसी का कोई नही होता हैं। हर कोई अपना-अपना करता मगर धर्म ऐसा मार्ग हैं  जहाॅ किसी के सामने हाथ नही फैलाना पडता हैं यहाॅ हर कोई अपना हो जाता हैं। उक्त विचार आज मंगलवार को राजेन्द्रसूरि ज्ञान मन्दिर मे आचार्य श्रीमृदूलरत्नसुरी म.सा ने कहे। सुबह हरदेवलाला चौक से भव्य मंगल प्रवेश हुआ। रास्तेभर समाजजनो ने गवली की। कार्यक्रम के प्रारम्भ मे स्वागत गीत युक्ता मण्डलेेचा ने प्रस्तुत किया। गुरुवंदन इन्दरमल पिपाडा द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन राकेश नाहर ने किया। आचार्यश्री ने कहाॅ कि ईश्वर के सामने सच्चे मन से की गई पुकार कभी खाली नही जाती हैं सच्चे मन से भगवान की आराधना करना भाग्यशाली ही होता हैं, और मोक्ष के मार्ग पर जाना है तो धर्म आराधना मे कभी भी कमी नही होना चाहिये, साथ ही परमात्मा, देव और गुरु का साथ छोडने वाला कभी भी सुखी नही हुआ है, इसलिये इनका हाथ हमे कभी नही छोडना।

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