नई दिल्ली। जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने भारत के 47वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में आज शपथ ग्रहण किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भारत के प्रधान न्यायाधीश को सुबह लगभग 9.35 बजे पद की शपथ दिलाई।​ उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई और हाल ही में अयोध्या के विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ करने के फैसले में भी वह शामिल रहे हैं। 63 वर्षीय जस्टिस बोबडे ने रविवार को रिटायर हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की जगह लेंगे। माना जा रहा है कि उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति या उनके नाम को खारिज करने संबंधी कोलेजियम के फैसलों का खुलासा करने के मामले में वह पारंपरिक दृष्टिकोण अपनाएंगे। नामित प्रधान न्यायाधीश बोबडे ने अपने इंटरव्यू में कहा कि लोगों की प्रतिष्ठा को केवल नागरिकों की जानने की इच्छा पूरी करने के लिए बलिदान नहीं किया जा सकता। देश की अदालतों में जजों के खाली पड़े पदों और न्यायिक आधारभूत संरचना की कमी के सवाल पर जस्टिस बोबडे ने अपने पूर्ववर्ती CJI गोगोई की ओर से शुरू किए गए कार्यों को तार्किक मुकाम पर पहुंचाने की इच्छा जताई। जस्टिस गोगोई ने अदालतों में भर्तियों और आधारभूत संरचनाओं की कमी पर संज्ञान लिया और सभी राज्यों तथा संबंधित उच्च न्यायालयों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश देने के साथ खुद निगरानी भी की थी।

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