सरदारपुर। जनपद पंचायत सरदारपुर की ग्राम पंचायत देवीखेड़ा के ग्राम सारोठी में पंचायत एवं उपयंत्री की मिली भगत से निजी भूमि पर तालाब निर्माण कर लिया गया। तालाब का निर्माण भ्रष्टाचार की सारी हदे पार करते हुए किया गया। आज सरदारपुर एसडीएम कार्यालय में उक्त तालाब कि शिकायत लेकर ग्राम पंचायत देवीखेड़ा के ग्राम सारोठी के गंगाराम  पिता हरजी एवं मुन्नालान पिता गंगाराम भील अपनी जन सुनवाई में पहुँचे।
एसडीएम को जन सुनवाई में दिए गए आवेदन में आवेदक गंगाराम एवं मुन्नालाल ने बताया कि दोनों ग्राम पंचायत देवीखेड़ा के ग्राम सारोठी के निवासी हैं। जिन्हें शासन द्वारा पटवारी हल्का नंम्बर 10 सारोठी में सर्वे नम्बर 58/2 रकबा 0.638 एवं सर्वे नंम्बर 425 रकबा 2.299 हैक्टर भूमि पर कृषि भूमि का पट्टा दिया गया था। जिस पर ग्राम पंचायत देवीखेड़ा के सरपंच नारायण ओसारी, सचिव कैलाश ग्रेवाल तथा उपयंत्री राजेश पवैया द्वारा खेत तालाब की स्वीकृति बताकर जेसीबी मशीन से तालाब निर्माण कर फर्जी मजदूरी भुगतान व सामग्री भुगतान कर मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार किया गया। आवेदकों ने बताया कि विगत दिनों जनपद से पता करने पर ज्ञात हुआ कि उक्त तालाब खेत तालाब योजना के तहत स्वीकृत न होकर तालाब की स्वीकृति बम्बूल वाला नाला के नाम से स्वीकृत होकर ग्राम पंचायत का तालाब था। जो षड्यंत्र पूर्वक खेत तालाब बताकर तालाब का निर्माण कर धोखाधड़ी की हैं। तालाब निर्माण के दौरान फर्जी मस्टर एवं फर्जी खाते दर्ज कर लाखों रूपये का आहरण ग्राम पंचायत सरपंच, सचिव तथा उपयंत्री राजेश पवैया द्वारा उक्त तालाब स्वीकृति में ग्राम पंचायत देवीखेड़ा के मजरा टिमचखेड़ा की खाता खसरा नकले लगाई गई। जबकि तालाब आवेदकों की भूमि पर बनाया गया। आवेदकों ने आवेदन के साथ तालाब निर्माण के जेसीबी का वीडियो फुटेज, फर्जी मस्टर एवं सामग्री भुगतान के बील-व्हाउचर तथा आवेदकों को जारी कृषि भूमि का पट्टा देते हुए मामले की जाँच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की हैं।

जवाबदारी से पल्ला झाड़ते उपयंत्री
सरदारपुर जनपद पंचायत की कई ग्राम पंचायतों में इस प्रकार के मामले सामने आ सकते हैं। उक्त मामले को लेकर जब उपयंत्री राजेश पवैया से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत को जहाँ तालाब बनाना था वहां नही बनाया हैं। तालाब का कार्य पूर्ण नही हुआ हैं और मेरे द्वारा तालाब का मूल्यांकन नही किया गया हैं। 

सचिव एवं उपयंत्री की मिलीभगत..? 
मामले में उपयंत्री द्वारा अपनी जवाबदारी से पल्ला झाड़ा गया हैं। लेकिन आपको बता दे की उपयंत्री द्वारा ले आउट देने के पश्चात ही निर्माण कार्य की शुरुआत होती हैं तथा समय-समय पर उपयंत्री द्वारा कार्यस्थल पहुँचकर कार्य का निरीक्षण भी किया जाता हैं। लेकिन उक्त मामले में उपयंत्री राजेश पवैया अपनी जवाबदारी से पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहें हैं। उपयंत्री कह रहे हैं कि उनके द्वारा मूल्यांकन नही किया गया जबकि 70 से 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चूका हैं। मामले में ग्राम पंचायत सचिव व उपयंत्री राजेश पवैया की मिली भगत प्रतीत होती हैं..? जो जाँच का विषय हैं।

उपयंत्री द्वारा ले आउट देने के बाद ही प्रारंभ होता हैं कार्य -
जनपद पंचायत सरदारपुर के एपीओ प्रवीण भाटी ने बताया कि ग्राम पंचायत में प्रभारी उपयंत्री द्वारा ले आउट देने के बाद ही कार्य प्रारम्भ होता हैं। जिसके बाद उपयंत्री समय-समय पर कार्य स्थल का निरीक्षण करते हैं एवं कार्य का मूल्यांकन करते हैं। बिना मूल्यांकन के भुगतान नही किया जा सकता हैं।

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