नई दिल्ली। भारतीय स्पेस एजेंसी (इसरो) नें​ आज एक बार फिर इतिहास रच ​दिया है। आज सुबह 9.28 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा लॉन्च पैड से 14 सैटेलाइट एक साथ अंतरिक्ष में भेजे हैं। इन सैटेलाइट में सबसे महत्वपूर्ण है कार्टोसैट-3, जो कि एक सैन्य जासूसी उपग्रह है। इसके साथ अमेरिका के 13 नैनो सैटेलाइट भी लॉंन्च किए गए हैं। ये सभी सैटेलाइट 27 मिनट के अंदर अपनी कक्षा में स्थापित कर दिए गए। इन सैटेलाइट्स को पीएसएलवी सी-47 से भेजा ​गया है। यह पीएसएलवी-सी47 की 49वीं उड़ान हैैै। कार्टोसैट-3 सैटेलाइट के ज़रिये सरहदों की निगरानी की जाएगी। ये तीसरी पीढ़ी का उपग्रह है जिसमें हाई रेजोल्यूशन इमेजिंग कैपेसिटी है। ये पृथ्वी से 509 किलोमीचर ऊंची कक्षा में रहेगा और वहीं से भारत की सीमाओं की निगरानी करेगा। कार्टोसैट उपग्रह से किसी भी मौसम में धरती की तस्वीरें ली जा सकती हैं। इसके जरिए आसमान से दिन और रात दोनों समय जमीन से एक फीट की ऊंचाई तक की साफ तस्वीरें ली जा सकती हैं। रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि अभी तक इतनी सटीकता वाला सैटेलाइट कैमरा किसी देश ने लॉन्च नहीं किया है. अमेरिका की निजी स्पेस कंपनी डिजिटल ग्लोब का जियोआई-1 सैटेलाइट 16.14 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीरें ले सकता है।  गौरतलब है कि पाकिस्तान पर हुए सर्जिकल और एयर स्ट्राइक पर कार्टोसैट उपग्रहों की मदद ली गई थी। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के मौसम में पृथ्वी की तस्वीरें लेने में सक्षम। प्राकृतिक आपदाओं में मदद करेगा। यह कार्टोसैट श्रृंखला का नौवां उपग्रह है जिसे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकेंड लांच पैड से प्रक्षेपित किया जाएगा। कार्टोसेट—3 से ग्रामीण संसाधन, शहरी नियोजन, तटीय भूमि उपयोग, भूमि कवर, बुनियादी ढांचे के विकास में भी मदद मिलेगी। 

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