नरेन्द्र पँवार, दसाई-सरदारपुर। प्रदेश भर के स्कूलों में दिहाडी मजदूर से भी कम वेतन पर कार्य कर रहें अतिथि शिक्षकों का दशहरा बिना वेतन के निकल गया वहीं दिपावली के पूर्व भी इनको वेतन मिल सकेगा इसमें संदेह है। विगत तीन माह सें बिना वेतन के ये अतिथि शिक्षक अपनी सेवायें देने को मजबूर हैं। एक मजदूर भी साप्ताहिक, पाक्षिक या मासिक कार्य करने के बाद वेतन नहीं मिले तो उसकी क्या स्थिति निर्मित होगी यह कोई भुक्त भोगी ही बता सकता है। ऐसे में प्रदेश भर में शिक्षकों की कमी के स्थान पर अपनी सेवा देने वाले उन अतिथि शिक्षकों को तीन माह बाद भी वेतन नहीं मिलना बडे ही आश्चर्य की बात है।

पोर्टल पर ज्वाईनिंग भी नहीं - प्रदेश के शिक्षा विभाग ने तो अपना पोर्टल खोल कर अपने अतिथि शिक्षकों की पोर्टल पर प्रविष्ठि कर दीं लेकिन जनजातीय विभाग के स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते अतिथी शिक्षकों की व्यवस्था करने के जुलाई माह मे आदेश दिये गये थे। उसमें कई विद्यालयों मे अतिथि शिक्षक पद पर अनेक बेरोजगारों को आमंत्रित किया गया था। जिनमें आमंत्रित लोगों ने भौतिक रूप से ज्वाईन भी कर लिया था। लेकिन तीन माह बीत जाने पर भी अभी तक इन अतिथि शिक्षकों की पोर्टल पर ज्वाईनिंग नहीं हो पाई है। इस कारण अतिथि शिक्षक के कार्य में लगें ये शिक्षक अपने पूरे मन से कार्य नहीं कर पा रहे है। भले ही स्कूलों मे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति हो गई हों लेकिन पोर्टल पर ज्वाईनिंग नहीं हो पाने से नियुक्ति के बाद आज 90 दिन से अधिक निकल जाने के बाद भी अतिथि शिक्षक असमंजस में है। अतिथि शिक्षक मनोज पाटीदार, अर्जून मारू, श्याम शर्मा, अलका मारू, मिनाक्षी पाटीदार, अनिल पाटीदार, सन्नू निंगवाल सहित अनेक लोगों ने दिपावली पूर्व वेतन भुगतान करने की मांग की है।

नियुक्ति अधिकारी भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं - अतिथि शिक्षक के पद पर संकूल प्राचार्य ही अनुमति प्रदान कर इन्हे आमंत्रित करते है। लेकिन वर्तमान में संकूल प्राचार्य भी वेतन कब मिलेगा इस बात को दावे के साथ कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। यही कारण है कि पात्र अतिथि शिक्षकां को भी प्राचार्य एवं प्रधान पाठकगण ने अनोपचारिक ज्वाईनिंग के पूर्व लिखवा कर ले लिया है कि पोर्टल पर ज्वाईनिंग नहीं हो पाने पर वे किये गये कार्यो के वेतन का दावा नहीं करेगें। इसी असमंजस की स्थिति में नियुक्त अतिथि शिक्षक भी अपने पूरे जोश के साथ पढाई नहीं करवा पा रहे है। ऐसे में छात्रों के हित-अहित पर किसी का कोई घ्यान नहीं है। 

स्थानांतरण पर रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं - वर्तमान प्रदेश सरकार नें शिक्षकोंं के स्वेच्छित स्थानांतरण बडे स्तर पर किये है। लेकिन उनके स्थान पर रिक्त हुई जगहों पर अतिथि शिक्षक रखने का कोई प्रावधान नहीं किये जाने के चलते कई स्कूलों में शिक्षक नहीं होने से छात्रों की पढाई प्रभावित हो रही है।

इनका कहना है- 
वर्तमान में अतिथि शिक्षकों की पोर्टल पर प्रविष्ठि नहीं होने के कारण तथा आफलाईन वेतन भुगतान के आदेश एवं आवंटन के अभाव में इनका वेतन भुगतान नहीं किया गया है। वरिष्ठ कार्यालय के आदेश होने पर ही भुगतान किया जावेगा।   - आनंद पाठक, खंड शिक्षा अधिकारी सरदारपुर 

अतिथि शिक्षकों को तीन माह पूर्ण होने के बावजूद वेतन नहीं मिला है इस बात को लेकर हमने प्रदेश स्तर पर तथा जिला स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन देकर समस्या से अवगत करवाया है। दिपावली पूर्व वेतन भुगतान नहीं होता है तो अतिथि शिक्षक शीघ्र ही नई रणनीति बनाकर आंदोंलन करेगा। - लाखन चंदेल, संयुक्त अतिथि शिक्षक संघ जिला अध्यक्ष धार 

अनेको खोखले वादे कर सत्ता में आई कांग्रेस सरकार को बेरोजगारों पर ध्यान देना चाहिए। बेरोजगारों को अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य तो प्रदान कर दिया लेकिन उन्हें वेतन नहीं देना उनका अपमान है। बिना वेतन के अतिथि शिक्षक दीपावली कैसे मनाएंगे यह खुद मुख्यमंत्रीजी को और उनके विधायकों को सोचना चाहिए। - संजय बघेल जिला पंचायत सदस्य एवं भाजपा नेता 

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