नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सऊदी अरब के दौरे से भारत लौट आए हैं लेकिन उससे पहले वो दुनिया के सामने भारत की आर्थिक तरक्की के भविष्य की पूरी रूप रेखा पेश की। प्रधानमंत्री ने दुनिया को भरोसा दिया कि भारत में निवेश करने का मतलब है किसी को घाटा नहीं होगा। रियाद के मंच से पीएम दुनिया को ये समझाने में कामयाब हुए कि दुनिया के सबसे मजबूत उभरते बाजार के तौर पर भारत के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इस यात्रा में मोदी ने देश के शीर्ष नेता से गहन बातचीत की और एक अहम आर्थिक मंच को भी संबोधित किया। मोदी सोमवार को यहां पहुंचे थे।  प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज और वली अहद मोहम्मद बिन सलमान के साथ अनेक मुद्दों पर बातचीत की और इस दौरान अहम मुद्दों पर समन्वय के लिए रणनीतिक साझेदारी परिषद का गठन किया गया। दोनों देशों की ई-प्रवासन प्रणाली के बीच समन्वयन पर भी एक समझौता हुआ। साम्राज्य में रूपे कार्ड शुरू करने के संबंध में भी एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया,‘‘द्विपक्षीय संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति के साथ रवाना हो रहे हैं। भारत और सऊदी अरब के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रियाद से रवाना।’’ मोदी ने यहां ‘फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव’ को भी संबोधित किया। इसे मरुभूमि में दावोस कहा जा रहा है। अपने संबोधन में मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार पर जोर दिया और कहा कि कुछ शक्तिशाली देश इस वैश्विक निकाय का उपयोग संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक संस्था के बजाए इसे एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। सऊदी अरब में भारतीय समुदाय के 26 लाख लोग रहते हैं और वे सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय हैं।  पिछले कुछ वर्षों में सऊदी अरब के साथ भारत के संबंध प्रगाढ़ हुए हैं। 2017-18 में सऊदी अरब के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार 27.48 अरब अमेरिकी डॉलर था और वह भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया। सऊदी अरब ने पिछले महीने कहा था कि वह भारत में ऊर्जा, तेलशोधन, पेट्रोकेमिकल, बुनियादी ढांचे, कृषि, खनिज और खनन आदि क्षेत्रों में 100 अरब डालर का निवेश करने की उम्मीद कर रहा है। 

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