नई दिल्ली। महाबलीपुरम में आज दुनिया की दो महाशक्तियां मिलेंगी। वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अब तक 14 बार मिल चुके हैं लेकिन उनमें से अनौपचारिक बातचीत सिर्फ एक ही बार हुई है और आज ये दूसरा मौका है जब दोनों की अनौपचारिक मुलाकात होगी और इस खास मुलाकात के लिए तमिलनाडु का महाबलीपुरम शहर पूरी तरह तैयार है। बंगाल की खाड़ी के किनारे बसा ये शहर अपनी खूबसूरती से सबको आकर्षित करता है। यहां की सांस्कृतिक धरोहर, यहां की परंपराएं और यहां का इतिहास ऐसा है जिसने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी आकर्षित कर लिया।  दुनिया की दो बड़े देश के दो बड़े नेता यहां के खूबसूरत नजारों के बीच उन मुद्दों पर बात करेंगे, जिनसे भारत और चीन के बीच संबंधों में नई मिठास मिले। 2018 में मुलाकात के लिए चीन का शहर वुहान तय किया गया था, 2019 में भारत का महाबलीपुरम तय किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी खुद शी जिनपिंग को महाबलीपुरम में तीन खूबसूरत जगहों का दीदार कराएंगे।  सबसे पहले अपने खास मेहमान के साथ प्रधानमंत्री मोदी अर्जुन पेनेंस जाएंगे। यहां एक विशाल शिलापट्टी पर कई आकृतियां बनी हुई हैं जिनके बारे में मान्यता है कि ये तस्वीरें गंगा को धरती पर लाने की दास्तां बताती हैं। साथ ही एक मान्यता ये भी है कि कौरवों के विरुद्ध लड़ाई जीतने के लिए अर्जुन ने यहीं पर भगवान शिव से अस्त्र-शस्त्र पाने के लिए एक पैर पर खड़े होकर घनघोर तपस्या की थी। अर्जुन पेनेंस के बाद प्रधानमंत्री मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पंचरथ पर ले जाएंगे। यहां पांच अधूरे रथ बने हैं जिनके बारे में मान्यता है कि ये पांचों पांडवों के हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी अपने चीनी मेहमान को तट मंदिर में ले जाएंगे जो समुद्र के किनारे बना है। आज पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच हो रही ये मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल-370 हटाए जाने के बाद पहली बार दोनों नेता एक दूसरे के साथ होंगे। खासकर तब जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान चीन जाकर जिनपिंग के आगे अपना दुखड़ा रो आए हैं।

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