सुमित राठौड़, झाबुआ। झाबुआ विधानसभा उपचुनाव का मतदान आज शांतिपूर्ण रूप से संपन्न  हुआ। मतदान प्रातः 7 बजे से प्रारंभ होकर शाम 5 बजे तक हुआ। कही-कही 5 बजे बाद तक चल मतदान सिलसिला जारी रहा। झाबुआ उपचुनाव हेतु कुल 356 मतदान केन्द्र बनाए गए थे। कुल 2 लाख 77 हजार 599 मतदाता थे। झाबुआ विधानसभा उपचुनाव 2019 के लिए हुए मतदान में मतदान का कुल 61.92 प्रतिशत रहा। जिसमें महिला 85618 मतदाताओं और पुरुष 86268 पुरुष मतदाताओं ने मतदान किया। विधानसभा चुनाव 2018 के बाद प्रदेश में यह पहला उपचुनाव हो रहा है इसलिए इंदौर से लेकर भोपाल तक के नेताओं की नजर मतदान पर रही। वे भी लगातार मतदान की अपडेट लेते रहें।
कांग्रेस प्रत्याशी कांतीलाल भूरिया अपने परिवार के साथ मतदान करने पहुंचे तो इधर भानु भूरिया ने अपने गृह ग्राम में मतदान किया। विधानसभा उप चुनाव हेतु कुल 5 प्रत्याशी मैदान में है। भाजपा-कांग्रेस के अलावा भाजपा से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले कल्याणसिंह डामोर, निर्दलीय निलेश डामोर एवं रामेश्वर सिंगार ने भी मतदान किया। सभी प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम मशीन में कैद हो गई है। 24 अक्टूबर को मतगणना के बाद ही पता चलेगा कि इस बार की दिवाली के पटाखे कहा फूटने वाले है।

मतदान के लिए दिखी लंबी-लंबी कतारे -
समय के साथ ही मतदान करने वालों की भीड़ बढ़ती रही। कई जहग मतदान हेतु महिला एवं पुरूषों की लंबी-लंबी कतारे देखी गई। जैसे-जैसे दिन निकलता गया वैसे-वैसे मतदान का प्रतिशत भी बढ़ता गया। झाबुआ के जिला पुलिस अधिक्षक विनीत जैन एवं उनकी पत्नी शालिनी जैन के साथ ही झाबुआ कलेक्टर प्रबल सिपाहा ने भी मतदान किया। मतदान को लेकर नव मतदाताओं के साथ ही युवक-युवतीयों में जोश देखा गया। पुलिस-प्रशासन ने शांतिपूर्ण मतदान के बाद चैन की सांस ली है। अब उनके सामने मतगणना शातिपूर्ण रूप से करवाने की चुनौती है। शांतिपूर्ण मतदान हेतु भारी संख्या में पुलिस भी लगाया गया था। जिससे कोई भी अप्रिय घटना नही हुई।

24 को आएंगे नतीजे -
झाबुआ विधायक रहें गुमानसिंह डामोर का लोकसभा निर्वाचन में विजय होने के बाद उन्होंने झाबुआ विधायक पद से इस्तीफा दे दिया जिसके बाद झाबुआ विधासभा सीट हेतु उप चुनाव हो रहें। उप चुनाव में 15 साल का वनवास भुगत कर प्रदेश की सत्ता में आए कांग्रेस के लिए जीत हासिल करना काफी अहम है। वही विपक्ष में बैठी भाजपा के पूर्व सीएम शिवराज सिंह से लेकर हर नेता के लिए यह चुनाव जीतना बेहद जरूरी है। कांग्रेस के कांतीलाल भूरिया के लिए यह चुनाव जीतना इसलिए अहम है क्योंकी उनका राजनीतिक वर्चस्व दाव पर लगा है। वहीं भाजपा के भानु भूरिया को चुनाव जीत कर पार्टी और संगठन के विश्वास पर खरा उतरना है। शातिपूर्ण मतदान संपन्न होने के बाद 24 अक्टूबर को मतगणना होगी।

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