नरेन्द्र पँवार, दसाई। नगर मे श्यामप्रेमी द्वारा आयोजित खाटू श्याम के कीर्तन ने एक बार फिर अपनी अनूठी छाप छोडकर हर किसी का दिल जीत लिया। शनिवार का दिन सुबह से देर रात तक खाटू श्याम के नाम रहा ।सुबह नगर के प्रसिद्व इच्छापूर्ण हनुमान मन्दिर से विशाल खाटू शाम की निशान यात्रा ने लोगो का मनमोह लिया तो शाम को कीर्तन मे हर किसी को नृत्य करने पर मजबूर कर दिया। दुग्ध डेरी के पास खाटू श्याम का दरबार लगा जहॉ छप्पन भोग के साथ-साथ मनमोहक श्रृंगार भी किया गया था जो चलते राहगीरो के लिये आर्कषण रहा। ज्योत के लिये महिलाओ के साथ-साथ पुरुषो की लम्बी लाईन रही। हर कोई अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। जैसे ही धार की स्वीटी देवेश चौहान ने कीर्तन की है रात आज थाने आनो पडेगा भजन की प्रस्तुति दी पाण्डाल तांलियो से गूंज उठा और भक्तो से पाण्डाल खचाखच भरने लगा देखते-देखते पाण्डाल मे पैर रखने की भी जगह नही रही। हारे के सहारे के दरबार मे हर किसी का काम होता है, मक्सी के अमित पारीक द्वारा सुन्दर प्रस्तुति ने हर किसी को नृत्य करने पर मजबूर कर दिया। पारीक द्वारा एक से बढकर एक भजन प्रस्तुत किये जिससे पूरा माहौल धार्मिक हो गया। कोलकता के प्रसिद्व भजन गायक ने तेरे द्वारे आया रे बाबा मेरी लाज रखना की प्रस्तुति ने कार्यक्रम मे चार चांद लगा दिये तो कोमल तिवारी कानपुर द्वारा झूककर करो नमन मेरे दिन बदल गये ने कार्यक्रम मे आनंद ला दिया।
श्याम प्रेमी द्वारा आयोजित कार्यक्रम मे सुबह कब हो गई किसी को पता ही नही चला कार्यक्रम सुबह 5 बजे तक चलता रहा। कार्यक्रम मे बालिका मण्डल द्वारा मे कार्यक्रम की  व्यवस्था को देखा जिसके चलते किसी भी भक्त को कोई परेशानी नही हुई बालिक मण्डल का परिधान भी सभी का एक जैसा था। वही सभी श्यामप्रेमी अलग ड्रेस मे थे जिससे उनकी अलग पहचान बनी। कार्यक्रम के दौरान बीच-बीच मे फुलो की बारिश के साथ-साथ इत्र वर्षा की गई जिससे पूरा पाण्डाल महक उठा। समिति द्वारा खाटू श्याम के दुपट्टे का वितरण किया गया। 
खाटूश्याम समिति द्वारा सभी भजन गायको का शॉल श्रीफल और दसाई के अतिप्राचीन चमत्कारिक  हनुमानजी  तस्वीर देकर सम्मानीत किया गया। सम्मान समारोह के समय हारे के सहारे के जयकारे लगाये गये। कार्यक्रम स्थल पर सभी भक्तो के लिये समिति द्वारा निशुल्क चाय पान की व्यवस्था की गई थी। जिसका पूरा-पूरा लुप्फ भक्तो ने उठाया। कार्यक्रम में  दसाई, रतलाम, खिलेडी, धार, मनावर, उज्जैन, कुक्षी, बदनवार, मौलाना, राजगढ़, रिगनोद, नागदा, इन्दौर, पाना, बामनखेडी, केसरपुरा, अमझेरा, राजोद सहित कई आसपास और दूर-दूर से श्याम प्रेमी उपस्थित थे।

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