सुमित राठौड़, बामनिया। पिछले दिनों पेटलावद विकासखंड के ग्राम छोटी गेहण्डी की अंतरात्मा को झकझोरने वाली तस्वीर सामने आई थी। जिसने प्राशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी थी। लेकिन लगता हैं प्रशासन के जिम्मेदार अभी भी आँख बंद करके ही बैठे हैं। उससे जिम्मेदारो ने कोई सिख नहीं ली। शासन ने हर पंचायत में शमशान घाट हेतु श्रेणी अनुसार भरपूर पैसा खर्च किया। किन्तु कई पंचायत में ठेकेदारों की मनमानी पर अधिकारियों की चुप्पी समझ से परे हैं। कई जगह काम अधूरा छोड़ दिया गया है। ओर आम लोगों को उनके परिजनों को मरने के बाद दाह संस्कार हेतु भी सही स्थान नहीं मिल पाता है।
क्षेत्र में भारी बारिश से नाले उफान पर होने से ग्रामीणों को शव के अंतिम संस्कार  के लिए बड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उस घटना को कुछ ही दिन बीते है, ओर अब पेटलावद विकासखंड के एक ओर गांव से फिर वही तस्वीर सामने आई है जो प्राशासन ओर सरकारों के जूठे दावों की पोल खोल रही है।
मामला पेटलावद विकास खंड में बामनिया के समीप ग्राम छायन पश्चिम का है, जंहा दिनांक 02 अक्टूम्बर को ग्राम एक वृद्ध महिला का आकस्मिक निधन हो गया। जिनके दाह संस्कार के ग्रामीणों को बड़ी मशक्कत कर मुक्तिधाम तक पहुचना पड़ा। ग्रामीण शव को कंधे पर उठकर नदी से निकल कर आये, गिरते संभलते ग्रामीण नदी तक मुक्तिधाम तक पहुचे ओर महिला का अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीण प्रकाश वसुनिया, कैलाश वसुनिया, शंकर वसुनिया, रमेश वसुनिया, बालू वसुनिया, रामा वसुनिया, जोरसिंग वसुनिया, बाबु वसुनिया शम्भू वसुनिया, सैतान वसुनिया आदि ने बताया कि अगर बारिश में गाँव मे कोई देहांत हो जाता है तो ग्रामीणों को इसी तरह मशक्कत करना पड़ती है, पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जैसे तैसे मुक्तिधाम पर हम पहुचते, साथ जिस मुक्तिधाम पर हम अंतिम संस्कार करते वह भी पूर्ण रूप से अधूरा पड़ा है। जिससे भी बेहद परेशानियो के बीच अंतिम संस्कार किया जाता है। जिम्मेदारों का इस ओर कोई ध्यान नही है। पूर्व में भी कई बार जिम्मेदारो को समस्या से अवगत करवाया है लेकिन नतीजा सिफर रहा।

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