वीराज प्रजापति, सारंगी। गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा घर-घर और गली-गली विराजे। घरों में पूजा-अर्चना और मंगलमय आरती के साथ लोगों ने भगवान गणेश को विराजित किया। समिति के सदस्यों ने बाजे-गाजे के साथ झूमते हुए भगवान गणेश को मोहल्लों के पंडालों तक पहुंचाया। कुम्हारों और मूर्तिकारों के घर सुबह से रात तक मूर्तियां ले जाने वालों की भीड़ लगी रही। सारंगी में सोमवार को मेला जैसा माहौल रहा। गणेश समितियों के सदस्य बड़ी मूर्तियां ले जाने पहुंचे थे। घरों में विराजित करने के लिये लोग छोटी मूर्तियां लेने यहां आये थे। सुबह से रात तक मूर्तियां ले जाने का सिलसिला चलता रहा। समितियों ने मोहल्लों के पंडालों तक ठेला, पिकअप, मेटाडोर, ट्रक समेत अन्य खुले वाहनों का सहारा लिया। गांव की प्रतिष्ठित गणेशोत्सव समितियों ने बाजे-गाजे के साथ भगवान गणेश को पंडालों तक पहुंचाया। घरों में विराजित होने वाली छोटी मूर्तियों को लोग साइकिल, रिक्शा, बाइक में ले जाते रहे।

आसपास के गांवो में दिनभर चला सिलसिला -
आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दिनभर गणेश प्रतिमिाएं लाने का सिलसिला चलता रहा। लोगों ने अपनी सुविधा अनुसार विभिन्न वाहनों में प्रतिमाओं को घर और पंडालों तक पहुंचाया। रिक्शा, ठेला, पिकअप, ट्रक, साइकिल, बाइक समेत अन्य वाहनों में गणपति बप्पा का जयकारा लगाते हुए लोग प्रतिमाएं ले जाते नजर आये। इसके बाद विधि-विधान से पूजा कर भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित किया। तीजा और गणेश चतुर्थी के कारण सारंगी सदर बाजार गुलजार रहा। मायके आई बहन-बेटियों ने ज्वेलरी, कपड़ा, जूता-चप्पल और श्रृंगार सामग्रियों की जमकर खरीददारी की। मिठाई दुकानों में भी भीड़ नजर आई। आसपास के गांवों में गणेशोत्सव का उत्साह देखते ही बना। पहले ही दिन पर्व का उल्लास नजर आया। गणेश समितियों ने गणेश प्रतिमा को पंडालों तक पहुंचाया। कुम्हारों के घर मूर्तियां ले जाने वालों की भीड़ लगी रही। गांव की गलियों में भगवान गणेश का जयकारा गूंजता रहा। छोटे बच्चों में भी उत्साह नजर आया। 

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