राजगढ़। पूज्य श्री धर्मदास जैन स्वाध्याय संघ थांदला के  स्वाध्याय राजेंद्र रुनवाल, ललित भंसाली, मनीष शाह के द्वारा पर्युषण पर्व की धर्म आराधना चल रही है।  ललितभंसाली, मनीष शाह द्वारा अंतरगड़सूत्र  का वाचन कर अर्थ समझाया। धर्मसभा में  ललित भंसाली ने बताया कि बच्चों को धर्म के सुसंस्कार नहीं मिल पाते क्योंकि उनका ज्यादा समय टीवी कंप्यूटर, मोबाइल, लैपटॉप आदि साधन में वह अपना पूरा दिन लगा देते। बचपन से दिया गया संस्कार जो सीमेंट की तरह उनके जीवन में उतर जाता है। जिससे वह अपने संघ समाज परिवार का नाम रोशन करते हैं। बच्चों को अपनी पढ़ाई के लिए विदेश भेज देते हैं मगर धर्म के संस्कार के लिए उन्हें पाठशाला नहीं भेजते। बच्चों को अंग्रेजी में बात करता है तो बहुत अच्छा लगता है मगर उससे अगर लोगस्य का पाठ बोलें तो वह नही बता सकता है। बच्चों के धर्म के संस्कार बहुत कम है। अपने बच्चों को अधिक से अधिक धर्म आराधना में लगाए। जिस तरह गन्ने का रस निकलता है और बाद में वह मीठा लगता है। उसी तरह धर्म रस ऐसा निकलता है। बच्चा एक कोरे कागज के समान होता है माता-पिता को उस पर संस्कारों की ऐसी सुंदर इबारत लिखनी चाहिए। जिससे वह बच्चे का जीवन संवर जाए। समाज से हितेश वागरेचा ने बताया है कि तीनों स्वाध्याय द्वारा अच्छी धर्म आराधना चल रही है। अनेक श्रावक-श्राविकाओ ने आज उपवास, एकासना, आयंबिल, निवि, चांदनी वागरेचा के आज 14 उपवास है तथा  भारती खाबिया  के 6 उपवास है एवं आगे के भाव है। वही स्तवन की प्रस्तुति भी दी गई। 

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