राजगढ़। श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ पर पयुर्षण पर्व आचार्यश्री ऋषभचंद्रसूरीश्वर जी मसा के आज्ञानवुर्ती मुनिराजश्री रजतचंद्र विजयजी एवं वैराग्ययश विजयजी मसा सहित साध्वी मंडल की पावनतम निश्रा में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस महापर्व पर तपस्वियों ने तपस्या कर जीवन को धन्य बनाया। तीर्थ पर सौलह व आठ उपवास के तपस्वीयों का मंगलवार को पारणा व बहुमान होगा। पयुर्षण महापर्व के अंतिम दिवस पर बारसा सुत्र का वाचन हुआ। मुनिद्वंय की निश्रा में बारसा सूत्र का वाचन हुआ। प्रातः गुरु मंदिर से बारसा सूत्र पोथाजी का वरघोड़ा निकाला और लाभार्थी परिवार नवकार कलेक्शन बाग ने वोहराया। मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी म.सा. ने बारसा सूत्र के महत्व पर प्रकाश डाला। बारसा सूत्र की अष्टप्रकारी पूजन का लाभ रतनचंद्रजी नवीन कुमार जी बड़वानी परिवार ने लिया। बारसा सूत्र की पांच ज्ञान पूजा भी हुई। 5 अक्टूबर से प्रारंभ होने वाली नवपद ओलीजी आराधना के मुख्य लाभार्थी रमेष कुमार सुमनमल जी हजारीमल लुक्कड़, सहयोगी लाभार्थी नेमीचंद जैन, शैलेष कुमार जैन चैन्नई का बहुमान किया गया। 

संवत्सरी का प्रतिक्रमण कर जीवो से की क्षमा याचना -
पयुर्षण पर्व के अंतिम दिन को संवत्सरी का वार्षिक प्रतिक्रमण तीर्थ पर मुनिद्वय की निश्रा में हुआ। सामूहिक रूप से प्रतिक्रमण में समस्त जीवों से ‘‘मिच्छामी दुक्क्ड़म‘ बोलकर क्षमायाचना की गई।

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