राजगढ़। भारत में पंचाग निर्माण पद्धती सौर और ह्श्य दो प्रकार की है। सोर पद्धती सूर्य सिद्धकाल ग्रहलाद्यव आदि प्राच्य ग्रन्थो से रचित है, जो वर्तमान समय में वेधयेंत्रों के सम्मुख स्थल हो कर सान्तरित हो गई है। जबकि वृष्य (केतकी) पद्धती सुक्ष्म शास्त्र सम्मत व वेध सिद्ध है। सौर गणित से तिथियों में छः घण्टे तक सूर्य-चन्द्र गहणों में एक-डेढ़ घंटे तक एवं ग्र्रहो को अनेक अंशो तक का अंतर केतकी गणित व वेधशाला के यंन्त्रो से प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। इसलिए तिथ्यादि का निर्णय पद्धती से करना चाहिए। उक्त जानकारी देते हुए पं. राजेश शर्मा सोनगढ़ ने बताया की भारत में वर्तमान सयम में 90 प्रतिषत से अधिक पंचाग केतकी चित्रापक्षीय दृष्य गणित से निर्मित होकर प्रकाशित हो रहें है। भारत सरकार का राष्ट्रीय पंचाग भी दृग्गणित से भारत की लगभग सभी भाषाओं में प्रतिवर्ष प्रकाशित होता है। इसी कारण तिथियों, व्रतपर्वो आदी में बहुत बड़ा अंतर आ रहा है।

अभी सौर पंचागों मेे श्री कृष्णा जन्माष्टमी एक ही दिन स्मार्त वैष्णव दिनाक 23 व 24 अगस्त 2019 होने पर भारत वर्ष में दो दिन तक मनाइ गई थी। श्री हरितालिका तीज सौंर पंचागो (जो स्थुल एवं नेद्य सिद्ध नही है) मे 2 सितम्बर 2019 सोमवार को है। केतकी चित्रापक्षीय दृष्यगणित युत वेधसिद्ध पंचागों में 1 सितम्बर रविवार को है। तृतिया तिथी का क्षय होने से द्वितीया तिथी के दिन रविवार 1 सितम्बर के दि नही हरितालिका तीज का व्रत करना चाहिए। जैसा शास्त्र वचन है। दिनांक 2 सितम्बर सोमवार को केवल श्री गणेश चतुर्थी महापर्व है। मंगलवार को त्रयषिपंचमी व्रत होगा। आगामी व्रत पर्वो त्योहारों में भी कही-कही अंतर आयेगा। वहां पर भी दृष्यगणित पंचागो की तिथी -व्रतपर्वो को ग्रंह्य करना चाहिए। जिससे शास्त्र वचन व शुद्ध गणित की अवहेलना न हो सके।

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