आयुषी राठौर,पेटलावद। गत दिनों नगर में घुम रहे मवेशियों के खिलाफ अभियान छेडते हुए नगर परिषद ने पशुओं को पकड़कर बालोद्यान में रखा था। जहां पशु दिन भर धुप और बारिश में रहने को मजबुर हो रहें थे। इसके साथ हीं वहां उनके पिने के लिए नगर परिषद द्वारा पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी जिससे वह गंदा पानी पीने को मजबुर थे। नगर के कुछ समाज सेवकों द्वारा उन्हें घास डाली जा रही थी। नगर परिषद द्वारा पशुओं को इस बगीचें में भुखे प्यासे छोडा गया था। यह नगर परिषद की लापरवाहीं थी।जिसके चलते बेजुबान पशुओं को जान से हाथ धोना पड़ रहा है।।

इसका जिम्मेदार कौन है ?
इसके साथ ही नगर परिषद द्वारा बालोद्यान से पेड़ों को काटा जा रहा है। आपको पुनः याद दिलाना चाहते है कि इस बालोद्यान में 40 लाख रुपयों का भ्रष्टाचार हो चुका है। जिसमे परिषद द्वारा कभी बगीचे में पेड़ पौधों को तो लगाया नहीं ओर आज 15 साल बाद जो पहले से ही लगे हुए थे उन्हें काटा जा रहा है। यह सोचने का विषय है कि पेटलावद के युवाओं द्वारा एक तरफ ग्रीन पेटलावद सिटी का रूप दिया जा रहा तो दूसरी ओर नगर परिषद द्वारा लगे हुए पेड़ो की कटाई की जा रही है।।
सूत्रों की माने तो बालोद्यान की जगह कॉम्लेक्स बनाने की बात चल रही है। यदि यह सही है तो नगर परिषद द्वारा नगर वासियों के सपनों को तोड़ा जा रहा है और सरकारी खजाने का गलत उपयोग किया जाएगा। क्योकी सरकारी खजाने का उपयोग हमेसा नगर की जनता के हित में किया जाना चाहिए और नगरवासियों के हित के लिए यहाँ बालोद्यान ही बनना चाहिए। उक्त मामले में जब नगर परिषद सीएमओ लालसिंह राठौर से दूरभाष पर चर्चा की तो उन्होंने कहा की में मीटिंग में हु। 

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